एलो झेलो पश्चिम बंगाल की परम्परागत रैसिपी है। यह नवरात्र स्पेशल रेसिपी है। वैसे इसे दशहरा और दीवाली पर भी बनाया जाता है। यह खाने में बहुत टेस्टी होती है और इसे संरक्षित करके भी रखा जा सकता है। इसे जब दिल करे गर्म-गर्म चाय के साथ आप खा सकते हैं।
आवश्यक सामग्री-
आटा बनाने के लिए-
मैदा - 2 कप
घी - 3 टेबल स्पून
नमक - 1 पिंच
दूध - आधा कप
तेल - तलने के लिये
चाशनी के लिए-
चीनी - 2 कप
छोटी इलाइची - 4-5
ऐसे बनाएं आटा-
मैदा को किसी बड़े प्याले में लेकर नमक और घी डालकर अच्छी तरह से मिला लें। फिर थोड़ा-थोड़ा दूध डालकर पूरी जैसा सख्त आटा गूंथ लें। अब आटे को ढककर 20 मिनट के लिए रख दें। 20 मिनट बाद आटे को मसल कर चिकना कर लें और छोटी-छोटी लोइयां बनाकर तैयार कर लें। इतने आटे से 21-22 लोइयां बना लें। अब लोइयों को दबा कर पेड़े जैसा बना लें। अब एक-एक लोई उठाइए, चकले पर रखिए और पतला बेल लें। अब इसे किनारों से आधा सेमी छोड़ते हुए मोटे स्टेप्स काट लें। स्टेप्स को फोल्ड करके किनारे बांध लें और चपटा कर दें। एलो जेलो तैयार है। अब इसे बेलकर थाली में लगा लें।
ऐसे तलें-
ऐलो झेलो को तलने के लिए कढ़ाई में तेल डालकर गरम करें। अब मीडियम आंच करके ऐलो जेलो को तलने के लिए डाल दें। उतने ही डालें जितने कढ़ाई में आ सकें। इन्हें पलटते रहें और हल्का भूरा होने तक तलते रहें। अब इन्हें निकाल कर प्लेट में रख लें।
ऐसे बनेगी चाशनी
ऐलो झेलो के ऊपर 2 तार की चाशनी चढ़ाई जाती है। चाशनी के लिए किसी बर्तन में चीनी और एक कप पानी डाल कर उबलने के लिए के लिए रख दें। चीनी को पूरी तरह घुलने तक पकाते रहें। 2-3 मिनट और पकाकर चाशनी को चैक करें। इसकी 1-2 बूंदे किसी प्याली में गिराकर ठंडी होने के बाद उंगली और अंगूठे के बीच चिपका कर देखें।
अगर चाशनी से 2 तार निकल रहे हैं तो यह तैयार है। अगर दो तार नहीं बन रहे हैं तो इसे थोड़ा और पका कर फिर से चैक करें। चाशनी बनने के बाद उसे ठंडा होने दें। अब एक-एक ऐलो झेलो को चाशनी में डुबोकर निकाल लें और प्लेट में रखते जाएं। सूखने के बाद आप इन्हें कंटेनर में भरकर भी रख सकते हैं।
कुछ सुझाव-
ऐलो झेलो का आटा गूंथते समय, घी की जगह रिफाइन्ड तेल भी डाला जा सकता है। इन्हें तेल की जगह घी में तला जा सकता है। ऐलो झेलो का आटा गूंथते समय आप चाहें तो एक छोटी चम्मच कलोंजी डाल सकते हैं। अगर आप अधिक मीठे ऐलो झेलो खाना चाहते हैं तोचाशनी को 2 तार वाली तार से थोड़ा-सा और गाढ़ा कर लें या इन्हें एक बार चाशनी से निकालने पर ठंडा होने के बाद दूसरी बार फिर से चाशनी में डुबाकर निकाल लें।