कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू ने पाकिस्तान द्वारा सिख श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर कॉरिडोर खोलने का मुद्दा केंद्र सरकार के समक्ष उठाया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लिखे पत्र में सिद्धू ने कहा कि मौका आया है, कदम बढ़ाएं और दरवाजा खोलें। सिद्धू ने पत्र में लिखा है कि 1947 में देश के विभाजन के समय भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और भावुक चोट पहुंचीं। इसके साथ एक और झटका यह लगा कि बहुत से ऐतिहासिक गुरद्वारे पाकिस्तान में रह गए।
तब से सिखों को उन गुरुद्वारों के दर्शन के लिए वीजा की जरूरत पड़ती है। ऐसा ही ऐतिहासिक गुरद्वारा करतारपुर साहिब है, जहां गुरु नानक देव जी ने जीवन के अंतिम 18 साल बिताए थे। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास है। इसे लेकर श्रद्धालु इतने भावुक हैं कि वे बीएसएफ द्वारा डेरा बाबा नानक में लगाई दूरबीन से गुरुद्वारे का दर्शन करते हैं।
कुछ पावन मिट्टी को छूते हैं तो कुछ आंसू भरी आंखें लिए चले जाते हैं। पंजाब के पर्यटन मंत्री ने पत्र में कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ा कि वहां के धार्मिक स्थलों का दर्शन एक समस्या बन गया। लेकिन अब हमारे दरवाजे पर अवसर ने दस्तक दी है। पाकिस्तान ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने में सकारात्मक रुख दिखाया है, कई सालों से यह मांग रही है।
कॉरिडोर खुलना दुनिया भर के सिखों के लिए बड़ी बात
सिद्धू ने लिखा है कि जब वह इमरान खान की ताजपोशी में गए थे तो कुछ सकारात्मकता आई थी। अब पाक मंत्री फवाद चौधरी ने कहा है कि गुरु नानक देव जी के 550वें गुरु पर्व पर संगतों को बिना वीजा करतारपुर साहिब के दर्शन करने दिए जाएंगे। कॉरिडोर खुलना दुनिया भर के सिखों के लिए बहुत बड़ी बात है। मेरी विनम्र विनती है कि इस मामले में हरसंभव प्रयास किए जाएं ताकि सिखों को वह खुशी मिल सके, जिसके सपने वे सारा जीवन देखते आए हैं।