सिपाही सुजान सिंह के भाई महिंदर सिंह ने बताया कि उनके भाई ने 1965 के भारत-पाक युद्ध में पाक सैनिकों को धूल चटाई थी। इसके बाद पाक सेना द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। बेटे के गम में मां संतो देवी ने खाना पीना छोड़ दिया और कुछ समय बाद चल बसीं। इसके बाद युद्धबंदी भाई के इंतजार में उनके चार भाई भी संसार को अलविदा कह गए।
1970 में मिली थी पाक जेल में बंद होने की खबर
महिंदर सिंह ने बताया कि उनका भाई 1957 में भारतीय सेना की 14वीं फील्ड रेजीमेंट में भर्ती हुआ था। जब भारत पाक युद्ध का एलान हुआ तो उनके विवाह को छह महीने ही हुए थे। युद्ध समाप्ति की घोषणा के बाद भी जब उनका भाई नहीं लौटा तो परिवार को किसी अनहोनी का भय सताने लगा। 1970 में उन्हें पाकिस्तान जेल में बंद होने की जानकारी जेल से लिखे खत से मिली। इसके बाद छह जुलाई 1970 को अमृतसर के साहोवाल गांव के दो कैदी पाक जेल से रिहा होकर वतन लौटे तो उन्होंने अमृतसर में सुपरिंटेंडेंट को लिखित में बताया कि भारतीय सेना का वायरलेस ऑपरेटर सुजान सिंह सियालकोट जेल के इंटेरोगेशन सेल में बंद है।
वहां पर उस पर जुल्म ढहाए जा रहे है। वह तब से अपने भाई को पाकिस्तान से रिहा करवाने के लिए भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं। इस मौके पर शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि जब तक पाक जेलों में बंद 54 जंगी सिपाहियों की रिहाई नहीं होगी, तब तक भारत-पाक रिश्तों पर जमीं बर्फ नहीं पिघलेगी।