प्रदेश की राजनीति में अपना आधार तलाश रहे पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू ने कहा कि वह प्रदेश की पिछली तीन सरकारों में भागीदार रहे। खून पसीना एक कर उन्होंने तीन सरकारों का गठन किया। जब भी उन्होंने सरकार बनाई एक दैत्य रूपी सिस्टम उनके समाने खड़ा हो गया। इस सिस्टम ने उनको आवाज दी कि मेरे सठो चलो या अलग-थलग हो जायो।
साथ चलोगे तो आनंद में रहोगे। मेवे खायोगे। वह इस सिस्टम के साथ नहीं मिले। वह सिस्टम के बीच रह कर लड़े। दरकिनार हो गए लेकिन एक इंच भी पीछे नहीं हटे। इस सिस्टम के साथ उनकी लड़ाई आज भी जारी है। वह कोई भी फैसला लेने से पहले सो बार सोचते हैं। जब वह स्टैंड लेते हैं तो पीछे नहीं हटते।
सिद्धू ने जारी एक वीडियो में पंजाबियों से धर्म युद्ध लड़ने का आह्वान किया। धर्मों से सबसे ऊंचा धर्म राष्ट्र धर्म है। सिद्धू ने खुद ही धर्म युद्ध की परिभाषा बताते हुए कहा कि माटी का कर्ज उतरने के लिए लड़ना, वह सोच जो राष्ट्र को समर्पित हो जाये, जिस सोच ने शहीद भगत सिंह पैदा किया।
सिद्धू ने धर्म युद्ध के साथ सचखंड श्री हरिमंदर साहिब का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भी वह श्री दरबार साहिब में माथा टेकने के लिए जाते हैं, देखते हैं के धर्म का झंडा सबसे ऊंचा है। सिद्धू संगत के बीच ही उन्हें रब दिखता है। पंजाब के कल्याण में सभी का कल्याण है। सिद्धू ने पंजाबियों से अपील की कि वह एक जुट हो जाएं। सिद्धू के अनुसार उनकी लड़ाई विचारधारा की है किसी व्यक्ति विशेष के साथ नहीं है।