नवजोत सिंह सिद्धू और बिक्रम सिंह मजीठिया।
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पंजाब विधानसभा में मंगलवार को बजट पर बहस के दौरान सदन ठहाकों से गूंज उठा। अकाली दल के विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया ने कविता के माध्यम से सत्ता पक्ष पर सवाल खड़े किए तो कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया। मजीठिया की कविता से हूबहू मेल खाती कविता नवजोत सिंह सिद्धू ने पढ़ी। कविता से सिद्धू ने एक साथ सवालों की झड़ी लगा दी। इस दौरान मजीठिया को कोई जवाब नहीं सूझा।
सदन में बजट प्रस्ताव पर बहस में हिस्सा लेते हुए बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाबी भाषा में एक कविता पढ़ी। उन्होंने कहा कि किसी ने बहुत ही सुंदर शब्दों में सवाल उठाए हैं, जिन्हें वे उसी तरह यहां प्रस्तुत कर रहे हैं -
किस शह का मूल्य घटाया है, पूछो भी।
कौन सा अलग तीर चलाया है, पूछो भी।।
जितने भी हैं बैठे बीच असेंबली के,
कोरा लट्ठा जिसने भी पहना, पूछो भी।।
जिन्होंने तुम्हें दिए फूल बहारों के,
हमारे आंगन क्यों नहीं आया, पूछो भी।।
हमारे नाम पर जो कर्जा लेते हैं,
कहां जाता है वह सरमाया, पूछो भी।।
अपने सूटों को ही देखते रहते हो,
मैंने क्यों पहना फटा कुर्ता, पूछो भी।।
साइकिल वाले वारिस बन गए पजैरो के,
इतना पैसा कहां से आया, पूछो भी।।
हमने तो उठाकर बैठाया बाबा कुर्सी पर,
इसने हमें अब कहा पराया, पूछो भी।।
(पंजाबी कविता का हिंदी रूपांतरण)