शताब्दी स्मारक कार्यक्रम का न्योता मिलने के बाद भी पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू सोमवार को कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। हालांकि कार्यक्रम में अमृतसर शहर के सभी विधायक जिसमें डॉ. राजकुमार, सुनील दत्ती व इंदरबीर सिंह बुलारिया शामिल रहे। इससे जाहिर है कि उनकी मुख्यमंत्री के साथ दूरिया बरकरार हैं।
सिद्धू कई दिन से पटियाला स्थित अपने पैतृक घर में ठहरे हैं और वहीं से किसान आंदोलन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। सिद्धू ने सोमवार को ट्वीट किया कि किसान अपने दायरे को छोड़कर अब देश में सड़कों पर आ रहे राजनीतिक बदलाव का इंजन बन गया है।
‘सम्मान नहीं, बुजुर्गों की शहादत को मिले मान्यता’
जलियांवाला बाग में शहीद हुए तारा चंद कपूर के पोते बिमल कपूर को इस बात का रंज है कि 102 साल बीत जाने के बाद भी उनके दादा को शहीद का दर्जा नहीं मिला है। पंजाब सरकार ने उन्हें सम्मानित करने के लिए बुलाया था लेकिन उनके परिवार को सम्मान नहीं उनके दादा की शहादत को मान्यता मिलने की दरकार है।
एक अन्य शहीद अमी चंद के पड़पोते रजिंदर शर्मा ने कहा कि सरकार शहीदों के परिवारों को सरकारी नौकरी दे। गुरदासपुर से पहुंचे सतवंत सिंह ने कहा कि उनके दादा शहीद हुए थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शहीदों की याद में गावों में स्मारक स्थापित करने की घोषणा की है। यह अच्छा कदम है। इस घोषणा को जल्द अमलीजामा पहनाना होगा।