दरअसल, कांग्रेस की चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि गत 25 जुलाई को स्थानीय निकाय मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा ने अमृतसर के विधायकों के साथ बैठक बुलाई थी, जिसमें नवजोत सिंह सिद्धू हिस्सा लेने नहीं पहुंचे। दूसरी ओर, सिद्धू ने कैबिनेट मंत्री का पद छोड़ने के बाद अमृतसर के अपने हलके में सक्रियता भी बढ़ा दी है, जिसके तहत वह अपने समर्थकों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।
माना जा रहा है कि सिद्धू अपने हलके के विकास और समस्याओं को लेकर अपनी ही सरकार को सदन में घेर सकते हैं। राज्य सरकार की बड़ी चिंता यही है कि अगर सिद्धू ने सदन में अपनी सरकार की योजनाओं पर सवाल उठा दिए तो विपक्ष को सरकार पर हमले का बड़ा मौका मिल जाएगा और सरकार दो तरफा बचाव की हालत में आ जाएगी।
सिद्धू के इस्तीफे को लेकर पार्टी में एक विशेष बात यह भी देखी गई थी कि मुख्यमंत्री के इस्तीफा स्वीकारने संबंधी फैसले का किसी मंत्री या कांग्रेस विधायक ने स्वागत नहीं किया था बल्कि इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस विधायकों में खामोशी छाई हुई है। इसी आशंका के मद्देनजर, पता चला है कि कांग्रेस ने सत्र शुरु होने से पहले अपने विधायकों को साधने की कोशिशें तेज कर दी हैं।