पंजाब विधानसभा चुनाव में अभी लगभग दो वर्ष हैं। जित्तेगा पंजाब और टिकटॉक के माध्यम से कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ दो-दो हाथ करने का संकेत दे चुके सिद्धू इस पर भी नजर गड़ाए हैं कि कुछ मंत्री इस मुद्दे पर कैप्टन से अलग होते हैं तो सिद्धू उनको अपने खेमे में लाकर कांग्रेस हाई कमान पर दबाव बना सकते हैं। इसमें सिद्धू की सबसे बड़ी मांग कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाकर किसी सीनियर कांग्रेसी विधायक को सीएम की कुर्सी सौंपने की होगी।
प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में सुलग रही चिंगारी कैप्टन की कुर्सी पर कितना प्रभाव डालेगी, यह समय तय करेगा। लेकिन 2002 में पहली बार मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की कार्यप्रणाली के खिलाफ तत्कालीन मंत्री बीबी राजिंदर कौर भट्ठल ने आवाज बुलंद की थी। तब भट्ठल को राजनीति के बाबा बोहड़ रघुनन्दन लाल भाटिया का समर्थन हासिल था।
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भाटिया समर्थक कई विधायक, जिसमें डॉ. राज कुमार भी शामिल थे, ने कैप्टन की कार्यप्रणाली का डट कर विरोध करके हाई कमान को उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने की बात की थी। अब डॉ. राजकुमार कैप्टन गुट में हैं। कैप्टन की कार्यप्रणाली के विरोधी विधायकों ने अभी चुप्पी धारण की हुई है। मंत्रियों का यह विवाद प्रदेश की राजनीति के समीकरण बदलेगा, सिद्धू गुट को इस बात का पूरा विश्वास है।