इस समारोह में पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमर जावेद बाजवा से गले मिलने के बाद सिद्धू विवादों में आ गए थे। तब सिद्धू ने कहा था कि बाजवा ने उन्हें करतारपुर कॉरिडोर खोलने की जानकारी दी थी, इससे भावुक होकर वह बाजवा के गले मिले थे। बाद में सिद्धू इमरान खान के न्योते पर करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे।
करतारपुर कॉरिडोर का क्रेडिट सिद्धू परिवार नहीं लेना चाहता: डॉ. सिद्धू
इससे पहले सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि पाकिस्तान से आया न्योता उन्हें मिल चुका है। पाकिस्तान जाने के लिए सिद्धू ने पंजाब और केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए पत्र लिखे हैं। उन्होंने कहा कि वह भी श्री गुरुद्वारा करतारपुर साहिब के दर्शनों को जाना चाहती हैं, लेकिन किसी सियासी टीम के साथ वे नहीं जाएंगी।
एक सवाल के जवाब में डॉ. सिद्धू ने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर खुलने का क्रेडिट सिद्धू परिवार को नहीं चाहिए। उनका परिवार भी संगत में शामिल है। कॉरिडोर वाहेगुरु जी की मर्जी से खुला है। उन्हें इस बात का सुकून है कि श्रद्धालु बिना पासपोर्ट गुरुद्वारा साहिब के दर्शन कर सकते हैं।
सिद्धू भाजपा में शामिल नहीं हो रहे: नवजोत
इस दौरान डॉ. सिद्धू ने कहा कि सुल्तानपुर लोधी में मुख्य कार्यक्रम में दो स्टेज के पीछे शिअद की सियासत है। उन्होंने कहा कि उनके पति भाजपा में शामिल नहीं हो रहे हैं। सिद्धू कभी किसी की पीठ में छुरा नहीं घोंपते। वह राजनीति में अपने पति के साथ हैं, इसलिए वह कांग्रेस में हैं।
सांसद सुखेदव सिंह ढींढसा ने शनिवार को कहा कि करतारपुर कारिडोर खुलने में नवजोत सिद्धू ने सकारात्मक रोल निभाया है, लेकिन पूरा क्रेडिट उन्हें देना सही नहीं है। इसमें भारत और पाकिस्तान सरकार का भी अहम रोल रहा है। ढींढसा शनिवार को लुधियाना के गुजरांवाल गुरु नानक देव खालसा कॉलेज में आयोजित सेमिनार में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का 550वां पर्व पूरे विश्व में मनाया जा रहा है। गुरु पर्व के मौके पर लग रही अलग अलग स्टेज पर उन्होंने कहा कि यह सही नहीं है। सभी को एकजुट होकर यह पर्व मनाना चाहिए क्योंकि अलग अलग स्टेज पर भी गुरु साहिब के अलावा कोई क्या बोल सकता है।
शिअद से त्याग पत्र देने के सवाल पर ढींढसा ने कहा कि जब वहां पर पार्टी के सिद्धांतों पर कोई बात नहीं होती है, तो वहां रहने का क्या फायदा। शिरोमणि अकाली दल में अभी मैं हूं। इस पार्टी के लिए बड़ी कुर्बानियां दी है। प्रकाश सिंह बादल या सुखबीर बादल से बातचीत होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब कोई बात नहीं होती है।