हार्ट फेल होने की वजह से ही हार्ट अटैक आता है। हार्ट की मसल्स में कमजोरी होने पर हार्ट फेल्योर की संभावना बढ़ती है। यह कहना है फोर्टिस के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बाली का। सेक्टर 35 के होटल जेब्डल्यू मैरिएट में तीसरे नेशनल हार्ट फेल्यर सम्मिट का आयोजन किया गया।
इस दौरान फोर्टिस के कार्डियोलाजिस्ट ने अपनी कैथ लैब में आपरेशन किया और उसे होटल मैरिएट में लाइव देखा। डाक्टर बाली ने बताया कि मरीज की एक नाड़ी पूरी तरह से ब्लाक थी, जबकि दूसरी नाड़ी आधी ब्लाक थी। उन्होंने कलाई के जरिए आपरेशन किया और साथी डाक्टरों को विस्तार से बताया।
उन्होंने बताया कि हार्ट फेल्यर व हार्ट अटैक में काफी अंतर है। यदि व्यक्ति अपने कोलेस्ट्राल को कंट्रोल कर ले तो काफी हद तक मरीज हार्ट डिसीज से बच सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 10-15 सालों में यंग व्यक्तियों में हार्ट की बीमारी ज्यादा हो रही है।
बैड कोलेस्ट्राल को न बढ़ने दें
डाक्टर बाली ने बताया कि यदि व्यक्ति चार चीजें ध्यान रखे तो उसे कभी हार्ट की डिसीज नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि एक स्वास्थ्य व्यक्ति का कोलेस्ट्राल 200 से कम होना चाहिए। एचडीएल यानी गुल कोलेस्ट्राल 40 से ज्यादा, एलडीएल बेड कोलेस्ट्राल 100 से कम व ट्राइगिलिस्राइड 150 से कम होना चाहिए।
113 स्पेशलिस्ट डाक्टर पहुंचे
होटल मैरिएट में आयोजित कांफ्रेंस में दिल्ली, बंगलूरू, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई व मलेशिया से कार्डियोलाजिस्ट पहुंचे। डॉ. बाली ने बताया कि हृदय रोग के विभन्न पहलुओं पर एक्सपर्ट्स ने लेक्चर दिए। विषयों में हार्ट अटैक, कोरोनरी आर्टरी की बीमारी, हार्ट फेल, कैरोटिड आर्टरी की बीमारी, एब्डॉमिनल एऑर्टिक एन्योरिज्म, एऑर्टिक डिस्सेक्शंस, एरिथमियस आदि शामिल थे। डायबिटीज, किडनी रोग और पेरिफरल आर्टरी की बीमारी से ग्रस्त मरीजों में हृदय रोग का इलाज अपने आप में एक बड़ा एजेंडा है। एक्सपर्ट्स भारतीयों, खासकर नौजवानों, में हृदय रोग से बचने के उपायों पर चरचा की गई।