ओएक्सएल स्कूल ऑफ मल्टीमीडिया की तरफ से राष्ट्रीय आयोग के समक्ष एक रिवीजन पिटीशन फाइल की गई थी। शिकायत के अनुसार शिकायतकर्ता की डिग्री इसलिए पूरी नहीं हो पाई थी क्योंकि यूजीसी ने कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के साथ ओएक्सएल स्कूल की एफिलिएशन रद्द कर दी थी।
दरअसल, ओएक्सएल स्कूल कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से एफिलेटेड था और अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों को कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी से डिग्री प्रदान कराता था। इस रिवीजन पटीशन पर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग की फुल बेंच ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी विद्यार्थी उपभोक्ता नहीं होता है, इसलिए वह राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में शिकायत नहीं कर सकता है।
स्कूल से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई उपभोक्ता फोरम में नहीं
राष्ट्रीय आयोग ने यह भी साफ किया कि किसी भी स्कूल से जुड़े मामले की सुनवाई उपभोक्ता फोरम में नहीं की जाएगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा ही होता आया है, लेकिन किन्ही कारणों की वजह से ‘शिक्षण संस्थान’ और ‘कोचिंग संस्थान’ के बीच कन्फ्यूजन पैदा हो गया था, जिसकी वजह से कई मामले उपभोक्ता फोरम में दायर हो रहे थे। उन्होंने साफ किया है कि स्कूल में ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी या अन्य मामलों को लेकर भी उपभोक्ता फोरम में स्कूल को पार्टी नहीं बनाया जा सकता है।
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