विशेष चिल्ड्रन थिएटर के लिए मशहूर निर्देशक विनोद कुमार शर्मा उर्फ वीके की खासियत है कि वह बच्चों के लिए एक ऐसी कहानी बुनते हैं जो मासूम हो और उसमें संदेश भी हो।
बुधवार शाम टैगोर थिएटर में ऐसा ही कुछ देखने को मिला। मौका था नाटक ‘भाग्य अपना अपना’ के मंचन का। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से एक महीने से चल रही वर्कशॉप का समापन इस नाटक से हुआ।
कादिर को केंद्र में रखकर बुनी गई कहानी
नाटक की कहानी कादिर नाम के युवक के इर्द गिर्द घूमती है, जो बहुत सुस्त है। उसका भाई उसे हमेशा डांटता है कि वह मेहनत क्यों नहीं करता है। एक दिन कादिर गांव के सरपंच की लड़की को अपने दिल की बात बताता है। लड़की कादिर की शिकायत उसके घर में कर देती है।
इस पर कादिर को उसके घरवाले भला बुरा कहते हैं। कादिर अपने भाग्य से परेशान हो पूछता है कि उसका भाग्य कहां है। कादिर का भाई उससे कहता है कि उसका भाग्य दूर किसी पेड़ के नीचे सो रहा है। वह भाग्य की तलाश में निकल पड़ता है। इस बीच कई लोगों से मिलता है।
अंत में भाग्य से उसकी मुलाकात होती है, लेकिन उसका भाग्य उसे चेताता है कि वह सोच समझ कर उसकी दी हुई शक्तियों का फायदा उठाए, लेकिन अपनी सुस्ती के कारण वह सब कुछ गवां बैठता है।
बच्चों का अभिनय शानदार
बच्चों ने बड़े मासूमियत से अपने किरदार को निभाया है। बीच-बीच में गलतियां हुईं, लेकिन बच्चों की गलतियों में भी बहुत मजा आता है। एक सीन में जब कादिर अपने प्यार का इजहार करता है तो लड़की उसे थप्पड़ मार देती है उसकी शक्ल में गुस्सा होना चाहिए, लेकिन वह अपनी हंसी नहीं रोक पाती है। ऐसा सीन नाटक को बहुत ही क्यूट बना देता है। नाटक में बच्चे अभिनय से ज्यादा गीत गाते हैं जो कर्णप्रिय थे।
लाइट्स को रंगों से खेला
नाटक वन एक्ट था इसलिए इसमें लाइट्स को केवल रंगों द्वारा ही खेला गया। पीछे साइक्लोगामा (सफेद पर्दा) का इस्तेमाल लाइट्स के रंगों को और शानदार बनाता है।