प्रसिद्ध नाटककार और रंगकर्मी गुरशरण सिंह की याद में गुरशरण सिंह यादगार ट्रस्ट द्वारा उठण दा वेला कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पंजाब कला भवन में स्वर्गीय गुरशरण सिंह की पत्नी कैलाश कौर और बेटी नवशरण कौर और अन्य पारिवारिक सदस्य मौजूद रहे।
इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई गीतकार राम कुमार के गीत ‘बहुत अरसा गुजरा है पर फिर भी वो बहुत याद आते हैं’ से। इसके बाद गुरशरण सिंह के लिखे प्रसिद्ध नाटक दित्तू सिंह मजहबी की दास्तां। इस नाटक को डायरेक्ट किया इकहत्तर ने। यह एक दलित मजदूर दित्तू की कहानी है।
नाटक की शुरुआत होती है एक जमीन से जिसमें दलितों के लिए शौचालय बनना है। इसके लिए फंड भी अलाट हो चुका है। वहां इसका विरोध करने वाले कई सवर्ण हैं। वह कहते हैं कि यहां शौचालय नहीं बन सकता। दित्तू इससे इतना क्रोधित हो जाता है कि गांव के सभी मजदूरों को लेकर सरपंच के घर पहुंच जाता है और उनसे कहता है कि अब शौचालय उनके घर में ही जाएंगे। क्योंकि गांव का कोई अन्य व्यक्ति उनको इसकी अनुमति नहीं देगा।
आखिरकार सरपंच कहता है कि जमीन पर शौचालय ही बनेगा। इस मौके पर दिल्ली की संगीत मंडली मजमा और चंडीगढ़ स्कूल आफ ड्रामा द्वारा प्रोटेस्ट गीत पेश किया गया। इस मौके पर प्रो. उमा चक्रवर्ती, अमोलक सिंह और अतुल सूद द्वारा महिला अधिकारों और आर्थिक राजनीति की बदलती तस्वीर पर चरचा की गई।
इस मौके पर कराची की एक फैक्ट्री बाल्दिया में 12 सितंबर वर्ष 2012 को लगी आग से हुई 258 मजदूरों की मौत पर आधारित एक वीडियो फिल्म भी दिखाई गई। इन मजदूरों के परिवार अपने अधिकारों की जंग लड़ रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में सुचेतक मंच द्वारा एक्शन गीत मशालां बाल के चलणां, जदों तक रात बाकी है पेश किया गया।