पाकिस्तान की पंजाब यूनिवर्सिटी की रिसर्च स्कॉलर फौजिया इशहाक की पुस्तक नानकायन की ट्रांसक्रिप्ट और विवरण इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है। प्रो. मोहन सिंह द्वारा लिखित, नानकायन शाहमुखी में और रिसर्च स्कॉलर फौजिया इशहाक की ओर से गुरमुखी में लिखी गई है। पुस्तक की खूबी यह है कि यदि आप इस पुस्तक को दाहिनी ओर से पढे़ंगे तो यह पुस्तक शाहमुखी में है और यदि आप बाईं ओर से पढ़ेंगे तो यह पुस्तक गुरमुखी में पढ़ी जा सकती है।
रिसर्च स्कॉलर फौजिया इशहाक ने कहा कि इस पुस्तक में बाबा नानक के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत किया है। पंजाब के महान लेखक प्रोफेसर मोहन सिंह ने गुरु नानक देव जी को श्रद्धांजलि देते हुए और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हुए एक महान काव्य पुस्तक नानकायन लिखी थी, उन्होंने इस पर काम किया है।
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किताब में गुरु नानक जी के बारे में विस्तार से लिखा गया है। जो अपने माता-पिता का सम्मान करते थे, बीबी नानकी के छोटे भाई, बाबा नानक जिन्होंने सुलखनी के दिल पर राज किया और दुनिया भर के लोगों का नेतृत्व किया। फौजिया ने बताया कि जब वह एमए पंजाबी कर रही थी तो एक विषय गुरमुखी था और एमए की पढ़ाई के दौरान उन्होंने गुरमुखी पढ़ी और सीखी और एमए में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने एमए अंग्रेजी ए प्लस ग्रेड से उत्तीर्ण की। उन्होंने गुरु नानक साहिब पर एम फिल भी किया है।
फौजिया के अनुसार, इस पुस्तक को लिखने के दौरान, उन्होंने गुरुद्वारा जन्म स्थान श्री ननकाना साहिब से गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब, श्री करतारपुर साहिब तक कई बार यात्रा की और गुरु नानक साहिब के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि प्रो. मोहन सिंह का जन्म पोठोहर में हुआ था और विभाजन के समय वे भारत आ गए।
फौजिया वर्तमान में चार और पुस्तकों पर काम कर रही हैं। उन्होंने अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि वह महाराजा रणजीत सिंह के कार्यकाल की शिक्षा नीतियों पर पीएचडी करने की तैयारी कर रही हैं।