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नंदिता पुरी ने मनमोहक नृत्य से दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

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चंडीगढ़। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला की ओर से आयोजित चंडीगढ़ शास्त्रीय नृत्य महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को अदाकारा और कथक नृत्यांगना नंदिता पुरी ने शानदार प्रस्तुति से मन मोह लिया। उन्होंने गंगा स्तुति और रावण द्वारा लिखित शिव तांडव के श्लोकों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत कर दर्शकों को अपनी मनमोहक नृत्य कला से मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान एनजेडसीसी निदेशक डॉ. सौभाग्य वर्धन, कथक नृत्यांगना अनु सिन्हा और कला जगत से कलाकार उपस्थित रहे।
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इस अवसर पर नंदिता ने राग माला यानी चार रागों के संयोजन पर एक कोरियोग्राफी द्वारा शृंगार के विभिन्न पहलुओं को चित्रित किया। इसके बाद उन्होंने धमार ताल में शुद्ध कथक प्रस्तुत किया। इसमें तोड़े, टुकड़े, लयकारी आदि शामिल थे। उन्होंने दुर्गा स्तुति के साथ अपनी प्रस्तुति का समापन किया। इस दौरान तबले पर पंडित कालीनाथ मिश्रा, वोकल और हारमोनियम पर वैभव मनकंड और सितार पर अलका गुजर ने योगदान दिया। नृत्य से पहले बिहार के हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक वंश प्रभात ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया।
लॉकडाउन ने सिखाया हमारी जरूरतें सीमित हैं
नंदिता ने बताया कि कोविड 19 के कारण लॉकडाउन के समय जब घर बैठे थे, तब महसूस किया हमारी जरूरतें बहुत सीमित हैं। खुशहाल जीवन जीने के लिए हमें ज्यादा चीजों की आवश्यकता नहीं होती, हम व्यर्थ ही भौतिक चीजों के पीछे अपना समय बर्बाद करते हैं। सब कुछ सामान्य होने पर बहुत खुश हूं। मंच पर दर्शकों के सामने प्रस्तुति देना नए साल का तोहफा है। नंदिता 1978 में कला से जुड़ी थी। उन्होंने बताया गुरु शंकर देव झा से उन्होंने कत्थक सीखना शुरू किया। तब वे देहरादून में थी। इसके बाद मुंबई में पद्मश्री डॉ. रोशन कुमारी से सीखना शुरू किया। उनके पास वह आठ साल तक रही, यह सुनहरा अवसर और दौर था। उन्होंने बताया उन्हें नृत्य के दौरान ही एक्टिंग का ऑफर आया था। लेकिन आज भी नृत्य उनकी प्राथमिकता है। वह कई टेलीविजन धारावाहिक और फिल्म में एक्टिंग कर चुकी है।
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