नगर निगम सदन की सोमवार को हुई बैठक बेहद हंगामेदार हुई। हालांकि बैठक में विकास का एक भी एजेंडा नहीं आना था, लेकिन विपक्षी पार्षदों ने इसी मुद्दे को हथियार बनाकर हंगामा किया।
इतना ही नहीं बैठक में एक्शन टेकन रिपोर्ट न आने की बात पर मेयर हरफूलचंद्र कल्याण से इस्तीफा तक मांगा गया। काफी देर तक इसी बात पर बहस होती रही। विपक्ष का कहना था कि यह जनता के पैसे का दुरुपयोग है।
लोकसभा चुनाव के चलते शहर में अभी भी आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है। ऐसे में कोई विकास का एजेंडा नहीं लाया जा सकता था। एक्शन टेकन रिपोर्ट पर चर्चा जरूर की जानी थी, लेकिन बैठक में ऐसी कोई रिपोर्ट आई ही नहीं। इसी बात पर विपक्षी पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। पहले भाजपा पार्षद सौरभ जोशी ने कहा कि हमें अभी तक नहीं पता कि बैठक क्यों बुलाई गई है।
मेयर बोले अफसरों ने नहीं दी रिपोर्ट
विपक्ष के तीखे सवालों का मेयर ने अटपटा सा जवाब दिया, जिस पर और बहस छिड़ गई। मेयर ने कहा कि उन्होंने एक्शन टेकन रिपोर्ट अफसरों से मांगी थी, लेकिन सब अफसरों ने कहा कि वे इलेक्शन ड्यूटी में व्यस्त थे और रिपोर्ट बन नहीं पाई। मेयर के इस जवाब पर अकाली पार्षद मलकीत सिंह ने कहा कि अगर रिपोर्ट अधूरी थी तो कुछ दिन बाद मीटिंग रख लेते। सभी पार्षदों ने मेयर को इस्तीफा देने और बैठक पर हुए खर्च को अपनी जेब से देने को कहा।
मुकेश आनंद को ही बैठा दो मेयर की कुर्सी पर
इसी विवाद पर अपना पक्ष रखने से पहले मेयर कल्याण ने चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद को जवाब देने को कहा। इस पर सभी विपक्षी पार्षद भड़क पड़े। इतना ही नहीं अरुण सूद ने तो ये तक कह दिया कि आप उठ जाओ और मुकेश आनंद को ही बैठा दो मेयर की कुर्सी पर।
पिछली बैठक न बुलाने पर भी हंगामा
निगम सदन की पिछले महीने बैठक न होने के मुद्दे पर भी खूब हंगामा हुआ। अरुण सूद ने कहा कि निगम एक्ट सेक्शन-55 के मुताबिक एक महीने में एक बैठक अनिवार्य होती है। उन्होंने कहा कि मेयर ने निगम कानूनों की उल्लंघना की है। मेयर ने कहा कि उन्होंने बैठक के बारे में चुनाव विभाग से इजाजत मांगी थी, लेकिन विभाग ने उन्हें 10 अप्रैल से पहले बैठक न बुलाने के निर्देश दिए। इस पर सूद ने कहा कि जब बैठक अनिवार्य है तो मेयर ने इजाजत मांगी ही क्यों? सूद ने कहा कि मेयर ने ‘आ बैल मुझे मार’ वाला काम किया है।