चंडीगढ़ नगर निगम ने सेलवेल कंपनी को अलॉट किए गए टॉयलेट ब्लॉक्स रद्द करने का फैसला किया है। मंगलवार को नगर निगम ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह जानकारी सुनवाई के दौरान दी।
निगम ने कहा है कि कंपनी ने समझौते की शर्तों को पूरा नहीं किया है। उधर, कंपनी ने कहा है कि निगम ने अपने इस फैसले के बारे में अभी तक उन्हें कोई सूचना नहीं दी है। निगम द्वारा हाईकोर्ट में दिए गए जवाब पर कंपनी ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है।
इसके बाद चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 13 मई तक के लिए स्थगित कर दी।
मालूम हो कि चंडीगढ़ नगर निगम ने कंपनी को 85 टॉयलेट ब्लॉक आवंटित किए थे। इनमें से स्थानांतरण बेस वाले 40 ब्लॉक पर विज्ञापन लगाने की फीस कंपनी को जमा करवानी थी।
2008 में यह फीस जमा करवानी बंद कर दी गई। साढ़े पांच साल तक यह फीस नहीं जमा की गई, इसके बावजूद निगम के ओएसडी दो ने कंपनी के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया।
ओएसडी-दो ने अक्तूबर 2013 में यह मामला उठाया। जिसके बाद विज्ञापन फीस के 75 लाख सेलवेल कंपनी को जमा करवाने के निर्देश दिए गए, लेकिन कंपनी ने यह फीस जमा नहीं करवाई।
जब निगम ने कंपनी को टॉयलेट ब्लॉक वापस करने का आदेश दिया तो कंपनी ने निगम के आदेश को चुनौती दी और यह ठेका जारी रखने की मांग की। जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।