चंडीगढ़ नगर निगम अब ‘फेक बिल’ पर एक्शन की तैयारी में है। इसके लिए नगर निगम ने चीफ इंजीनियर की अगुवाई में एक टीम का गठित की है। यह टीम ऐसे बिलों की पहले जांच करेगी और उसके बाद उनको अपनी सूची से हमेशा के लिए हटा देगा। यह मामला तब पकड़ में आया जबकि कई विभागों ने इस मामले में शिकायत दर्ज करवाई। ये बिल उनको भेजे जा रहे है जो पानी का उपयोग करना वर्षों पहले छोड़ चुके है। पहले गार्डन और पार्कों का सिंचाई भी पीने के पानी से किया जाता था।
सैंकड़ों की संख्या में हैं डिफाल्टर
जानकारी के अनुसार 5 अप्रैल 2019 तक चार करोड़ 82 लाख रुपये से भी अधिक राशि डिफाल्टरों के पास बकाया है। जानकारी के अनुसार नगर निगम ने 20 हजार से भी ज्यादा की डिफाल्टर लिस्ट तैयार की है। इसमें कई विभागों के पास लाखों रुपये का बिल बकाया है। कई ऐसे विभागों को पानी का लाखों रुपये का बिल भेजा जा रहा है जो कई वर्ष पहले से ही पानी का कनेक्शन कटवा दिया है पर नगर निगम के खाते से नाम नहीं काटे जाने के कारण वर्षों से बिल लगातार आ रहा है। अब हजारों का बिल लाखों में आ रहा है।
सेक्टर 18 के प्रेस लाइट प्वाइंट पर कभी राउंड अबाउट था। उस राउंड अबाउट पर हरियाली के लिए पानी का कनेक्शन लिया गया था। वर्षों पहले जब राउंड अबाउट हटाया गया और वहां लाइट प्वाइंट बना दिया गया। लेकिन यहां अभी भी बिल जनरेट होता है। इसका बिल लाखों में पहुंच चुका है। उधर, हार्टिकल्चर विंग के पार्कों और गार्डन में अपना ट्यूबवेल और टर्शरी वाटर का कनेक्शन है। पीने के पानी का कनेक्शन भी काट दिया गया है। लेकिन इसमें पब्लिक हेल्थ के खाते से नाम नहीं काटा गया। जिसकी वजह से हार्टिकल्चर विंग का लाखों का बिल बकाया है।
कई फेक बिल हैं। इसकी फिजिकल वेरिफिकेशन कराने के लिए चीफ इंजीनियर को कहा गया है। ऐसा कभी नहीं हो सकता है कि लाखों का बिल बकाया हो और लोग इसका भुगतान न करें। इसकी शिकायत मेरे पास आई है। इसे ठीक कराया जाएगा।
- केके यादव, आईएएस, कमिश्नर नगर निगम चंडीगढ़