चंडीगढ़ निगम को हर साल पानी सप्लाई में 82 करोड़ का घाटा हो रहा है। ऐसे में घाटे से उबरने के लिए निगम ने पानी का रेट दोगुना करने की तैयारी कर ली है। इस संबंध में निगम सदन की अगली बैठक में एजेंडा लाया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017-18 में नगर निगम ने पानी पर 160.63 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि पानी से नगर निगम को मात्र 78.74 करोड़ रुपये का ही रेवेन्यू मिला। इसके पूरे मामले की जांच की गई थी, जिसमें यह बड़ा घाटा सामने आया।
हाल में एक रिपोर्ट में यह बताया कि गया है। वर्ष 24 मई 2011 में अंतिम बार पानी के रेट में संशोधन किया गया था। उसके बाद से पानी के रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार मोहाली, पंचकूला और दिल्ली से यदि चंडीगढ़ की तुलना की जाए तो यहां पानी के रेट काफी कम है। यही कारण है कि नगर निगम को हर साल 82 करोड़ का घाटा हो रहा है। पहले ही घाटे में चल रही नगर निगम को हर साल इतना घाटा और नुकसान पहुंचा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार तत्काल पानी के रेट को दोगुना कर देना चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट को पानी सप्लाई व्यवस्था मेंटेन करने के लिए 78.74 करोड़ के रेवेन्यू से कुछ नहीं होगा। इसके रेट बढ़ाकर मेंटेनेंस पर काफी खर्च करना होगा। सूत्रों की मानें तो इस बिल का पास होना तय है। क्योंकि घाटे में चल रही निगम को सख्त निर्णय लेने ही पड़ेंगे।
आठ साल में लगभग 500 करोड़ का घाटा
साल 2011 से पानी के रेट नहीं बढ़ाए गए हैं। सूत्रों की मानें तो आठ साल में पानी पर नगर निगम को लगभग 500 करोड़ का घाटा हुआ है। लगातार घाटा बढ़ने के बाद एक जांच कमेटी बनाई गई थी। इसमें बताया गया है कि पानी लीकेज, कर्मचारियों की सैलरी, पाइपों का मेंटेनेंस लेकर अन्य कार्यों में लगातार खर्चा तो बढ़ता गया, लेकिन उतनी ही तेजी से रेवेन्यू नहीं बढ़ा। परिणाम यह निकला कि वर्ष 2017-18 में नगर निगम को 82 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा।
अभी इस तरह लिए जाते हैं पानी के चार्ज
वर्तमान में शहर में 1 से 15 किलोलीटर तक पानी के रेट 2 रुपये प्रति लीटर, 16 से 30 किलोलीटर तक पानी के रेट 4 रुपये प्रति लीटर, 31 से 60 किलोलीटर तक पानी के रेट 6 रुपये प्रति लीटर है। रिपोर्ट के अनुसार अभी चंडीगढ़ में मोहाली, पंचकूला और दिल्ली की अपेक्षा पानी के रेट काफी कम हैं। इन रेटों को दोगुना करने की जरूरत है। क्योंकि इतना बड़ा घाटा पूरा करने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं आएगा।
पहले निगम पर पानी के बिलों का 27 करोड़ रुपया बकाया
नगर निगम ने कुछ दिनों पहले पानी के डिफॉल्टरों की सूची तैयार की थी। इसमें लगभग 3400 लोगों के नाम सामने आए थे। हालांकि इसमें नगर निगम पर ही काफी रुपया बकाया था। इन डिफॉल्टरों पर नगर निगम का 27 करोड़ रुपया बकाया था। इसके बाद पब्लिक हेल्थ ने कार्रवाई शुरू की और बकायेदारों से रुपया वसूलना शुरू कर दिया। जो लोग बकाया नहीं चुका रहे उनका पानी का कनेक्शन काट दिया जा रहा है।
हां एक रिपोर्ट में इसका जिक्र है कि नगर निगम को पिछले साल लगभग 82 करोड़ का घाटा हुआ था। इस पर विचार किया जा रहा है। जो भी निर्णय होगा, अगली सदन की बैठक में लेकर आएंगे। जिससे कि घाटे को पूरा किया जा सके।
- केके यादव, नगर निगम कमिश्नर