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पैसे कमाने का निगम का नया फंडा, दुकानें-शोरूम के बाहर से भी कमाएगा

Wed, 06 Jul 2016 11:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
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निगम करेगा कमाई, 5 से 10 हजार रुपये का शुल्क तय
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निगम अब फुटपाथ से भी कमाई करने जा रहा है। अब रेस्तरां, ढाबे और ईटिंग ज्वाइंट वाले अपना कारोबार करने के लिए दुकानों के बरामदे और पार्किंग के बीच की जगह का प्रयोग कर सकते हैं। रात 8:15 बजे से रात 10:30 बजे तक कुर्सी और टेबल लगाकर ग्राहकों को खाना खिलाने की परमिशन दी जाएगी।
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निगम की वित्त एवं अनुबंध कमेटी जगह का प्रयोग करने के बदले में हर माह 5 और 10 हजार रुपये की फीस भी वसूलने का निर्णय लेने जा रही है। उधर ईटिंग ज्वाइंट संचालकों का कहना है कि जो मासिक किराया तय किया है वह काफी ज्यादा है।

निगम के अनुसार बूथ वालों के लिए 5 और शोरूम के बाहर की जगह का प्रयोग करने के बदले में 10 हजार रुपये हर माह चार्ज किए जाएंगे। शहर के सभी रेस्तरां और ढाबे चलाने वालों को इसके लिए निगम से मंजूरी लेनी होगी।
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कमेटी ने फिर सर्वे कर रिपोर्ट देने को कहा
यह निर्णय लेने से पहले अतिक्रमण हटाओ दस्ते के कर्मचारियों ने पूरे शहर में सर्वे किया और रिपोर्ट दी कि इस समय शहर में 134 ईटिंग ज्वाइंट चल रहे हैं, लेकिन वित्त एवं अनुबंध कमेटी के सदस्यों को इस सर्वे पर विश्वास नहीं है। कमेटी ने फिर से सर्वे करके रिपोर्ट देने को कहा है। कमेटी का मानना है कि हर सेक्टर में 5 से 10 इटिंग ज्वाइंट चल रहे हैं।

 

अवैध काम न हो इसलिए लिया यह निर्णय

सड़कों, पटरियों पर कब्जा।
कमेटी के सदस्य एवं पूर्व मेयर सुभाष चावला का कहना है कि अभी ईटिंग ज्वाइंट के बाहर टेबल और कुर्सियां अवैध तरीके से लग रही थी। इन पर चेक रहे, इसलिए पार्किंग और बरामदे के बीच की जगह पर रात को काम करने की मंजूरी दी गई है। पहले सिर्फ शहर में चल रहे 8 इटिंग ज्वाइंट को ही मंजूरी देने का प्रस्ताव आया था, लेकिन फिर कमेटी ने निर्णय लिया कि पूरे शहर के इटिंग ज्वाइंटस और ढाबे वालों को यह मंजूरी दी जाएगी।

मंजूरी न लेने वालों से छह माह का जुर्माना वसूला जाएगा
निर्णय के बाद निगम ने अतिक्रमण हटाओ दस्ते को यह निर्देश दिया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जो भी अपने दुकान के बाहर सरकारी जमीन पर टेबल और कुर्सी लगा रहा है, वह इसकी मंजूरी ले। अगर कोई मंजूरी नहीं लेता है तो उसका सामान जब्त कर लिया जाए और वह सामान भविष्य में छोड़ा भी न जाए। इसके साथ ही छह माह का जुर्माना भी चार्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

लेकिन हालात कुछ और ही है
इस समय सेक्टर-11, 17, 24, 15 और 22 में सबसे ज्यादा ढाबे और इटिंग ज्वाइंटस हैं, यहां पर रात को नहीं बल्कि दिन में ही टेबल और कुर्सी लगाकर ग्राहकों को सर्व किया जाता है, लेकिन निगम के अतिक्रमण हटाओ दस्ते की ओर से कभी कोई कार्रवाई नहीं की जाती। नए आदेश में दस्ते को रात को भी इन्हें चेक करने के लिए कहा गया है।
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रात को दी मंजूरी तो दिन में तो हटाएं

सेक्टर 17 के व्यापारियों के साथ मीटिंग करते हुए मेयर अरुण सूद - फोटो : अमर उजाला
फॉसवेक अध्यक्ष बलजिंदर सिंह का कहना है कि एक ओर स्मार्ट सिटी बनाने का दावा किया जा रहा है और दूसरी जगह खुद ही सरकारी जमीन पर कब्जा करने की मंजूरी दी जा रही है। इस समय सेक्टर-17 बस स्टैंड के सामने रात को जगह-जगह खाने पीने के कियोस्क लग रहे हैं, जिससे शहर में जहां गंदगी बढ़ रही है वहीं अपराध भी बढ़ा है। कम से कम दिन में तो इन्हें हटाया जाना चाहिए।

बाजार से महिलाओं का निकलना हो जाता है मुश्किल
सेक्टर-18 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील चोपड़ा का कहना है कि अधिकतर लोग रात को ही सैर करते हैं। उनका कहना है कि जो ढाबा और इंटिंग ज्वाइंट रिहायशी इलाके के पास हैं वहां पर रहने वाले लोगों की दिक्कत बढ़ जाती है। कमाई बढ़ाने के लिए ऐसा कदम उठाना ठीक नहीं है।

व्यापार मंडल के महासचिव नरेश महाजन का कहना है कि इस समय बाजारों में अपने आप ही खाने पीने के कियोस्क बढ़ गए हैं जब से स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत नगर निगम ने सरकारी जमीन पर फड़ी लगाने वालों पर कार्रवाई करने पर पाबंदी लगाई हुई है उनका कहना है कि ऐसे फड़ी वाले किस तरह का खाने पीने का सामान बेच रहे हैं इसका कोई चेक भी नहीं है।
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