चंडीगढ़ नगर निगम के फायर ब्रिगेड विभाग में मनमानी का खुलासा हुआ है, जिसके बाद विभाग के अफसर तलब कर लिए गए हैं। तत्कालीन सब फायर ऑफिसर ने मनीमाजरा स्थित फायर स्टेशन से एक बाइक व बोलेरो गाड़ी मोहाली स्थित एक निजी अस्पताल में भेज दी। साथ ही उनके साथ तैनात कर्मचारियों को भी ऑन ड्यूटी अस्पताल में तैनात बता दिया।
मामले का खुलासा होते ही चीफ फायर ऑफिसर अनिल गर्ग ने फायर ऑफिसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। फायर ऑफिसर से मामले में जल्द जवाब देने को कहा गया है। वर्तमान में सेक्टर-17 स्थित फायर स्टेशन में तैनात फायर ऑफिसर अनिल शर्मा वर्ष 2017-18 में मनीमाजरा ऑफिस में सब फायर ऑफिसर के पद पर तैनात थे।
इस दौरान तत्कालीन स्टेशन फायर ऑफिसर एसके गोसाईं मोहाली के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। चूंकि एसके गोसाईं मेडिकल लीव पर थे, बावजूद इसके अनिल शर्मा ने एक बाइक व एक बोलेरो गाड़ी एसके गोसाईं की तीमारदारी में लगा दी। साथ इन गाड़ियों के साथ तैनात कर्मचारियों को ऑन ड्यूटी बताकर निजी काम में लगा दिया जबकि अनिल शर्मा के पास इस प्रकार की अनुमति देने की कोई पावर नहीं थी।
अनुशासनात्मक कार्रवाई में कर्मचारियों के हस्ताक्षर वाली लॉगबुक भी लगाई गईं हैं, जिसमें कर्मचारियों ने मनीमाजरा फायर स्टेशन से मोहाली स्थित निजी अस्पताल में जाने की सूचना के साथ हस्ताक्षर किए हैं। मामले में फायर ऑफिसर से जल्द जवाब मांगा गया है।
जुर्माना वसूलने के साथ कार्रवाई की बात कही
अनुशासनात्मक कार्रवाई में पद का दुरुपयोग करने के मामले में चीफ फायर ऑफिसर अनिल शर्मा से वाहनों के किलोमीटर के हिसाब से जुर्माने के साथ वसूली, जितने दिन कर्मचारियों की तैनाती अस्पताल में कई गई उनके वेतन की वसूली के साथ ही अपने अधिकारों का गलत प्रयोग करने के आरोप में कार्रवाई के लिए कहा गया है।
इतने दिन तक चली गाड़ियां
लॉगबुक के अनुसार, एक बाइक 24 व 28 नवंबर और 5 दिसंबर को मोहाली गई। इसके अलावा बोलेरो 7 और 15 नवंबर, 23 दिसंबर व 8 जनवरी को मनीमाजरा फायर स्टेशन से मोहाली स्थित निजी अस्पताल भेजी गई थी। अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ इस लॉगबुक को भी लगाया गया है।
फायर ऑफिसर अनिल शर्मा पर कई आरोप हैं। अपने पद का दुरुपयोग करने के मामले की जांच में भी वह दोषी सिद्ध हुए हैं। मामले में फायर ऑफिसर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। उनका जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं जो निगम के रुपयों का मामला है, उसकी भी रिकवरी जवाब आने के बाद कराई जाएगी।
- केके यादव, कमिश्नर, नगर निगम