आसमान की ओर टकटकी लगाए रहे लेकिन चांद का दीदार नहीं हुआ। इसके कारण वीरवार की जगह अब जुमा के दिन यानी शुक्रवार से रमजान का महीना का शुभारंभ होगा।
रमजान का पवित्र महीना साल के सभी महीनों में अहम माना जाता है। इस महीने में अल्लाह तआला ने कुरान अपने बंदों की हिदायत के लिए उतारा। इसलिए रमजान में पूरी दुनिया में जितना कुरान पढ़ा जाता है, पूरा साल उतना नहीं पढ़ा जाता।
दिन में रोजा और पांच वक्त की नमाज के अलावा रात को 20 रकआत तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है। यह कहना है सेक्टर-26 स्थित नूरानी मसजिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी का।
जुमे के दिन पहला रोजा
मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि जुमा के दिन पहला रोजा होगा इससे पवित्र महीने की पवित्रता और बढ़ जाएगी। क्योंकि जुमा हफ्ते की ईद होती है। मनीमाजरा स्थित जामा मसजिद के इमाम मौलवी सकील अहमद कासमी ने बताया कि वर्षों बाद जुमा के दिन रमजान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है।
पांच वक्त की नमाज
नमाज पांच वक्त पढ़ी जाती है। सुबह फजर की नमाज, दोपहर जोहर की नमाज, दोपहर बाद असर की नमाज, इफ्तार के बाद मगरीब की नमाज, मगरीब की नमाज के दो घंटे बाद ईशा के नमाज के बाद तरावीह की नमाज पढ़ी जाती है।