जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा का कलंक बने मुरथल गैंगरेप मामले में हाईकोर्ट ने एसआईटी को दोटूक कह दिया है कि एक माह के भीतर या तो ठोस परिणाम लाए या फिर हम जांच सीबीआई को दे देंगे। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी विशेष जांच दल की ओर से सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट पर दी, जिसमें एसआईटी ने कहा था कि उसके पास न तो कोई गवाह है, न कोई सबूत और न ही पीड़ित।
मामले की सुनवाई आरंभ होते ही विशेष जांच दल की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए एमिकस क्यूरी अनुपम गुप्ता ने कहा कि उन्हें वर्तमान में जांच कर रही ममता सिंह की अध्यक्षता वाली एसआईटी पर विश्वास नहीं है। जांच आरंभ होने से लेकर अभी तक केवल यह साबित करने के लिए काम किया जा रहा है कि मुरथल में गैंगरेप नहीं हुआ था। इसी बीच ममता सिंह ने कोर्ट को बताया कि समाचार पत्र के माध्यम से उन्हें एक बीएमडब्ल्यू की जानकारी मिली थी और खबर के अनुसार इससे महिलाओं को घसीट कर बाहर लाया गया और रेप हुआ। इसके बाद उस गाड़ी को जला दिया गया। ममता सिंह ने कहा कि इस गाड़ी के जलने के बाद इसके इंश्योरेंस को क्लेम किया गया होगा, इसी को आधार बनाकर बीमा कंपनियों से संपर्क किया गया और पूछा गया कि ऐसी किसी बीएमडब्ल्यू के लिए क्लेम किया गया है या नहीं।
15 कंपनियों ने इस पर अपना जवाब सौंपते हुए ऐसे किसी भी क्लेम से इनकार किया गया है, जबकि 8 का जवाब आना बाकी है। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि हरियाणा के किसी भी थाने में इसकी शिकायत नहीं दी गई थी। हाईकोर्ट ने इस पर एसआईटी से दोटूक शब्दों में पूछा कि इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी एसआईटी के हाथ खाली हैं। यदि एसआईटी को लगता है कि वह इस जांच को पूरा नहीं कर सकती तो बता दे फिर इसे सीबीआई को सौंप दिया जाए। इस पर ममता सिंह ने एक माह का समय दिए जाने की अपील की। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई पर फाइनल रिपोर्ट के साथ कोई ठोस परिणाम नहीं आता है तो उस स्थिति में जांच को सीबीआई को सौंप दी जाएगी।