इसके बाद परमजीत शाम को उसके घर गया तो वहां पहले से मौजूद पुलिस ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। इस दौरान परमजीत के पास मिले पुलिस पहचान पत्र से उसकी शिनाख्त हुई तो पुलिस ने इसे आतंकवादियों के साथ क्रॉस फायरिंग के दौरान गलती से गोली लगने का मामला बताकर गैर इरादतन हत्या की धाराओं के तहत केस दर्ज कर दिया।
इस पर परमजीत के परिवार ने इसे कत्ल का मामला बताते हुए अदालत का रुख किया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने इसमें आईपीसी की धारा 304 (ए), 120 बी गैर इरादतन हत्या का चार्ज लगा दिया।
अब अदालत ने मामले में आरोपी तत्कालीन एसएसचओ हरपाल सिंह (सेवानिवृत्त एसपी) समेत तत्कालीन एएसआई संतोख सिंह, गुरनाम सिंह तत्कालीन एएसआई बेला चौकी, इकबाल मोहम्मद हेड कांस्टेबल, मोहिंदर सिंह कांस्टेबल, सुखविंदर लाल कांस्टेबल, परमेल सिंह कांस्टेबल, रजिंदर सिंह कांस्टेबल, जसविंदर सिंह कांस्टेबल और मोहिंदर कौर पर हत्या के आरोप तय कर दिए हैं।
इंसाफ जरूर मिलेगा: रणधीर
मामले की पैरवी कर रहे रणधीर सिंह ने बताया कि केस लड़ने वाले उनके दादा दलजीत सिंह की 2015 में मौत हो चुकी है। बेशक मामले को 26 साल हो गए हैं, लेकिन उन्हें यकीन है कि इंसाफ जरूर मिलेगा।