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उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट पर सख्त कदम उठाने की तैयारी में निगम

Thu, 30 Jun 2016 10:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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फ्लैट्स - फोटो : demo pic
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15 प्रतिशत ईडब्लयूएस के फ्लैट्स का निर्माण करने के मामले में नगर निगम उप्पल हाउसिंग सोसाइटी को रिज्यूम करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बुधवार को सदन की बैठक में अधिकारियों को कानूनी पक्ष की डिटेल रिपोर्ट अगली बैठक में लाने के लिए कहा है।
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बुधवार को भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट की अलॉटमेंट और उसमें बनने वाले फ्लैट पर कई खामियां निकालीं। उन्होंने इसके लिए कांग्रेस के कार्यकाल और पूर्व सांसद पवन बंसल का भी चर्चा में नाम लिया। जिसके बाद यह निर्णय लिया कि मामले में सीबीआई ने 2012 में जांच कर प्रशासन को अपनी रिपोर्ट दी थी। उसके अनुसार आपराधिक मामला दर्ज कराने के लिए सभी 36 पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल सलाहकार विजय देव को मिलेगा।

सदन में अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में चार साल से विजिलेंस जांच भी चल रही है। लेकिन अभी तक इसकी रिपोर्ट पेंडिंग है। भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने कहा कि अभी तक इस प्रोजेक्ट पर इसलिए कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि प्रशासन के कई पूर्व अधिकारियों के यहां पर फ्लैट है। उन्होंने कहा कि यहां पर 1500 स्क्वेयर फुट से ज्यादा के फ्लैट नहीं बन सकते जबकि 2500 स्क्वेयर फुट एरिया के भी फ्लैट का निर्माण किया गया।
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खाली पड़े फ्लैट को रिज्यूम किया जाए
बैठक में मेयर अरुण सूद ने पार्षदों को तैयार किया कि इस समय इस प्रोजेक्ट में जो फ्लैट खाली हैं। उन्हें रिज्यूम कर लिया जाए, जबकि कार्यवाहक कमिश्नर राजीव गुप्ता इसके लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार खाली नहीं बल्कि पूरी सोसायटी की जमीन रिज्यूम की जा सकती है।

कर्मचारियों को बराबर की जमीन देने के लिए तैयार सदन
नगर निगम उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट की जमीन के बदले सरकारी कर्मचारियों को कहीं दूसरी जगह जमीन देने के लिए तैयार है, लेकिन इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि कर्मचारी जब तक ग्रुप हाउसिंग सोसायटी रजिस्टर्ड नहीं कराते तब तक उन्हें जमीन नहीं दी जा सकती। जबकि मेयर ने कहा कि सोसायटी रजिस्टर किए बिना भी जमीन दे देनी चाहिए। भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह ने सदन में कहा कि जिस जमीन पर उप्पल हाउसिंग प्रोजेक्ट का निर्माण हुआ है यह पहले नगर निगम के सरकारी कर्मचारियों को आवास के लिए देने का निर्णय हुआ था। 23 अगस्त 2002 को सदन ने इसे नीलाम करके सोसायटी को देने का निर्णय लिया गया, लेकिन यह भी फैसला लिया गया कि कर्मचारियों के लिए किसी दूसरी जगह पर जमीन तलाश की जाए। लेकिन अभी तक कर्मचारियों के लिए कोई जमीन तय नहीं हुई है।

पूर्व मेयर सुभाष चावला का कहना है कि कांग्रेस पर आरोप लगाने का कोई फायदा नहीं है। वह भी चाहते हैं कि जिन्होंने धांधली की है, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस समय भाजपा का अपना राज है, इसलिए तुरंत इस मामले में केस दर्ज होना चाहिए।

बच्चे देखने आए कार्रवाई
कार्रवाई और मेयर अरुण सूद को देखने के लिए उनके बच्चे भी सदन में आए लेकिन कांग्रेस, भाजपा और मनोनीत पार्षदों के हंगामे को देखकर वह बोर हो गए। जिसके बाद वह मेयर कार्यालय के रिटायरिंग रूम में चले गए जहां पर उन्होंने टीवी पर कार्टून देखा। मेयर अरुण सूद के अनुसार बच्चों की स्कूल में छुट्टियां थी जिस कारण वह आ गए।
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