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चुनाव: शिअद-भाजपा कहीं दोस्त तो कहीं दुश्मन

Sun, 15 Feb 2015 01:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नगर निकाय चुनाव के दौरान इस बार शिअद-भाजपा गठबंधन का अजीबोगरीब स्वरूप देखने को मिलेगा। दोनों दल कहीं दोस्त तो कहीं दुश्मन के रूप में नजर आएंगे। नगर परिषद तरनतारन और बटाला के चुनाव को लेकर शिअद-भाजपा में सहमति नहीं बन पाई है।
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अब यहां दोनों दलों के प्रत्याशी एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। गठबंधन की समन्वय समिति ने इन दोनों शहरों में उम्मीदवारों से संबंधित फैसला स्थानीय नेताओं पर छोड़ दिया है। हालांकि बाकी 120 नगर परिषदों/पंचायतों और छह नगर निगमों के चुनाव दोनों दल मिलकर लड़ेंगे।

समन्वय समिति की शनिवार को हुई बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि गठबंधन उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए शिअद-भाजपा गली- मोहल्ला स्तर तक कार्यकर्ताओं को बेहतर तालमेल से काम करने के लिए प्रेरित किया जाए।
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कमेटी सदस्यों शिअद सचिव डॉ. दलजीत सिंह चीमा और भाजपा के वरिष्ठ नेता तीक्ष्ण सूद के बीच विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। डॉ. चीमा और सूद के अनुसार, बैठक में कई मामलों पर विचार हुआ और सभी को परस्पर सहमति के साथ हल कर लिया गया है। बता दें कि पिछले नगर परिषद/पंचायत के चुनाव शिअद-भाजपा अलग-अलग लड़ते रहे हैं।

अलग राह की वजह
- तरनतारन में कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी के भाई के साथ अकाली नेताओं की ओर से की गई मारपीट
- बटाला में अकाली-भाजपा नेताओं की परस्पर विरोधी बयानबाजी से गठबंधन में दरार

अधिकृत उम्मीदवार की खिलाफत पर होगी कार्रवाई
डॉ. चीमा और सूद ने बताया कि दोनों पार्टियों ने अपने नेताओं व कार्यकर्ताओं को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि यदि 120 नगर परिषदों/पंचायतों के चुनाव के लिए कोई भी पार्टी नेता गठबंधन के  अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ मैदान में है, तो वह अगामी 16 फरवरी तक नामांकन वापस ले लें। ऐसा न होेने की सूरत में दोनों पार्टियां उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगी। पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार करने पर भी कार्रवाई होगी।
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