चंडीगढ़ नगर निगम में शामिल 13 गांव में विकास कार्यों के लिए 125 करोड़ का बजट एस्टीमेट तैयार कर लिया गया है। निगम ने प्रत्येक गांव के लिए 10 करोड़ रुपए का बजट तैयार किया है। इससे सीवर, सड़कें, बिजली पोल व तार सहित अन्य विकास कार्य कराए जाएंगे। अभी निगम के पास गांव के लिए कोई बजट नहीं है, इसलिए वहां विकास कार्य भी नहीं कराए गए हैं।
प्रशासन ने पिछले साल जनवरी में नगर निगम में 13 गांव शामिल किए थे। तबसे लेकर अब तक गांव में कोई विकास कार्य नहीं हुए हैं, क्योंकि इसके लिए निगम के पास बजट ही नहीं है। गांव में लगभग 20 साल पुरानी सीवर लाइन व पेयजल पाइप लाइन बिछी हुई है। लगातार बढ़ती संख्या के कारण अब सीवर ओवर फ्लो होने लगे हैं।
वहीं सरपंच व्यवस्था खत्म होने के बाद अब लोगों के सामने समस्या आ गई है कि वह किससे शिकायत करें। हाल ही में मेयर राजबाला मलिक ने भी गांव का दौरा शुरू किया है। इस दौरान किशनगढ़ में समस्याएं देखकर मेयर दंग रह गईं। मेयर ने अफसरों से व्यवस्थाएं द़ुरुस्त करने को कहा है। निगम ने 125 करोड़ का बजट तैयार कर टाउन प्लांनिंग डिपार्टमेंट को भेजने का निर्णय किया है।
प्रशासन की ओर से निगम में गांव शामिल करने के बावजूद इसके लिए कोई बजट नहीं रखा है। हालांकि निगम ने अपने बजट में गांव के विकास कार्यों के लिए 27 करोड़ रुपए का एस्टीमेट तैयार कर लिया है। इसमें 18 करोड़ से पब्लिक हेल्थ और 9 करोड़ रुपये से बीएंडआर के काम कराने हैं। वहीं 23.50 करोड़ रुपये से कॉलोनियों में विकास कार्य कराने की योजना है। यह वह कार्य हैं जो तत्काल प्रभाव से कराने ही हैं। ऐसे में निगम को प्रशासन से अतिरिक्त फंड लेना ही पड़ेगा।
नगर निगम गांव में सीवर बिछाने के लिए सलाहकार से भी सुझाव लेगा। चूंकि गांवों जनसंख्या बढ़ने के साथ निर्माण कार्य भी काफी हो गया है। बिना आर्किटेक्ट के बनाए गए घरों में सड़कों के लिए कोई मानक ही नहीं है। ऐसे में सीवर की खुदाई के दौरान काफी ध्यान रखना होगा। इसलिए निगम सलाहकार नियुक्त कर सीवर लाइन व अन्य काम की रूपरेखा तैयार करेगा। वहीं मनोनीत पार्षद के नेतृत्व में गांव के लिए बनाई गई सब कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर भी विकास कार्यों पर चर्चा होगी।
प्रशासक ने भी गांव का बजट एस्टीमेट तैयार करने को कहा था
पिछले साल तत्कालीन मेयर राजेश कालिया के नेतृत्व में सभी पार्षद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से अतिरिक्त बजट की मांग को लेकर पहुंचे थे। इस दौरान प्रशासक ने सड़कों के लिए अतिरिक्त बजट देने की घोषणा की थी। साथ ही गांव के लिए एस्टीमेट बनाने को कहा था, लेकिन निगम में भी बजट नहीं बनाया गया और प्रशासन के अधिकारियों ने भी केंद्र से गांव के लिए बजट मांगने की जहमत उठाई।