देश ही नहीं पूरी दुनिया हरियाणा के मेटल उद्योग का लोहा मानती है। रेवाड़ी के गली-कूचों में चल रही पीतल इंडस्ट्री अपनी क्वालिटी के दम पर थाईलैंड से मुकाबला कर रही है। देश में मेटल शीट के निर्यात में रेवाड़ी अव्वल है। जगाधरी का सौ साल पुराना बर्तन उद्योग भी समय की चुनौतियों के अनुरूप बदलाव कर डटा हुआ है।
आजादी से पहले इस उद्योग का अंकुर इन दोनों शहरों में फूटा और फिर गुणवत्ता और मेहनत से उद्यमियों ने इसे वटवृक्ष बनाया। ये उद्यमी इनोवेशन और समर्पण के दम पर न सिर्फ सभी चुनौतियों से पार पा रहे हैं, बल्कि उद्योग को आगे बढ़ा रहे हैं।
हरियाणा चैंबर्स एंड कामर्स व बर्तन निर्यातक के स्टेट प्रेजीडेंट भारत गर्ग कहते हैं कि कुछ साल पहले तक सरकार एक्सपोर्ट्स को दो प्रतिशत सब्सिडी देती थी, जिसे बंद कर दिया गया है। इससे 25-30 प्रतिशत निर्यात कम हो गया है। प्रदेश सरकार को यह सब्सिडी दोबारा शुरू करनी चाहिए।
आल इंडिया अल्यूमिनियम यूटेनसिल मेन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट तरूण कहते हैं कि इंडस्ट्रियल एरिया फेज टू में जमीन की कीमत आसमान छू रही है। इस कीमत पर यहां कोई भी आने को तैयार नहीं है। यदि सरकार बर्तन उद्योग को बढ़ावा देना चाहती है तो जमीन की कीमत कम करनी चाहिए।
द मानकपुर इंडिस्ट्रयल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसीडेंट पवन कुमार सैनी कहते हैं कि इंडस्ट्रियल एरिया में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है। जिन्होंने यहां फैक्ट्रियां लगाई हैं, उन्हें दो विभागों को शुल्क देना पड़ रहा है। एचएसआईडीसी प्लाट धारकों से मैनटेनेंस चार्ज लेती है और नगर निगम भी यहां हाउस टैक्स ले रहा है।
जगाधरी स्टेनलेस स्टील रि-रोलर एसोसिएशन के प्रेसीडेंट एपीएस भट्टी कहते हैं कि जगाधरी की इंडस्ट्री के लिए कॉमन इफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट बहुत जरूरी है। इससे उद्योगपतियों को आर्थिक लाभ तो होगा ही, प्रदूषण कम होने से पर्यावरण में भी सुधार होगा।
द जगाधरी मैटल मैन्यूफैक्चरर्स एंड स्पलायर्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट राज सलूजा कहते हैं कि सौ साल पुरानी इंडस्ट्री होने के बावजूद जगाधरी में आज तक टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर नहीं बन पाया है। उद्योगपति इसकी लंबे समय से मांग कर रहे हैं।
- राज सलूजा, प्रेसीडेंट