हरियाणा का गारमेंट और हेंडलूम उद्योग देश और विदेश में अपनी अलग पहचान रखता है। इस पहचान को बनाने में सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों का अहम योगदान है। यह एक ऐसी इंडस्ट्री है जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं को भी रोजगार मिलता है। बात चाहे पानीपत के हेंडलूम उद्योग की हो या परिधानों से दुनियां में धाक जमाने वाले गुड़गांव की गारमेंट इंडस्ट्री की।
इस उद्योग की खासियत यह है कि यह बड़ी संख्या में महिलाओं को भी रोजगार दे रहा है और नारी सशक्तीकरण में भूमिका निभा रहा है। पूरे देश से गारमेंट एक्सपोर्ट में करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी हरियाणा की है। एपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के आंकड़े बताते हैं कि हर साल हरियाणा से करीब 20 हजार करोड़ का गारमेंट एक्सपोर्ट होता है। गुणवत्ता के लिहाज से अपेक्षाकृत सस्ते उत्पादों की घरेलू बाजार में अच्छी मांग है।
गुड़गांव के अलासा फरीदाबाद में ड्राइंग, प्रिंटिंग और गारमेंट एक्सपोर्ट यूनिट हैं, जहां देश-विदेश के लिए कारोबार होता है। हैंडलूम उत्पादों के लिए पानीपत का नाम देश में अग्रणी है। यहां 125 कार्पेट यूनिट, 400 डाइंड यूनिट, 20 -25 ब्लैंकेट यूनिट के अलावा 250 शॉडी यार्न यूनिट और 4000 शटल लूस लूम और करीब 8000 पावर लूम हैं, जो टेक्सटाइल के अलावा हैं।
गुड़गांव के नारी परिधानों की है विदेश में खूब मांग
यहां की गारमेंट इंडस्ट्री न सिर्फ देश को विदेशी मुद्रा कमाकर देती है, बल्कि दो लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दे रही है। गुड़गांव में तैयार परिधान अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और ब्राजील में खूब पसंद किये जाते हैं। खासकर नारी परिधानों की इन देशों से खूब मांग है। प्रदेश के गारमेंट कारोबार में गुड़गांव का योगदान 72 फीसदी से ज्यादा है। सूक्ष्म और लघु इकाइयों के योगदान से चल रही इस इंडस्ट्री में 40 फीसदी महिला कर्मचारी हैं। यहां 400 से अधिक एमएसएमई गारमेंट इकाइयां हैं।
इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क को मंजूरी
केंद्र सरकार ने पानीपत में हैंडीक्राफ्ट के विकास की संभावनाओं को देखते हुए इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क के लिए मंजूरी दे दी है। 30 एकड़ में 140 करोड़ की लागत से इस परियोजना को अमली जामा पहनाने के बाद हैंडीक्राफ्ट के विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
बंग्लादेश से चुनौती
पिछले एक दशक से गुड़गांव के गारमेंट उद्योग को बांग्लादेश से कड़ी चुनौती मिल रही है। विदेशी निर्यात ऑर्डर 30 फीसदी कम हो गए हैं। इसलिए कई छोटी यूनिटों को पलायन करना पड़ा है।
महंगी लेबर
बांग्लादेश की तुलना में गुड़गांव में लेबर महंगी है। इस वजह से तुलनात्मक लागत ज्यादा है और इसका लाभ बांग्लादेश उठा रहा है। वह काफी कम कीमत पर माल निर्यात कर रहा है।
कॉटन पर सरकार की नीति
कॉटन को लेकर सरकार की कोई निश्चित नीति नहीं है। कभी वह उसके निर्यात पर रोक लगा देती है और कभी शुरू कर देती है। इससे कच्चे माल के रेट में हमेशा उतार चढ़ाव बना रहता है और उद्यमियों को इसका नुकसान उठाना पड़ता है।
कोई प्रोत्साहन नहीं
गुड़गांव के गारमेंट सेक्टर को सरकार की ओर से प्रोत्साहन नहीं मिल रहा है। उन्हें ऑर्डर मिल रहे हैं या नहीं इससे सरकार को कोई लेना देना नहीं है। उनकी समस्याओं को जानने का भी सरकार प्रयास नहीं करती। अगर एक्सपोर्टर अपनी परेशानी को उठाते हैं तो उनकी सुनवाई नहीं होती। चीन और बांग्लादेश की सरकार अपने एक्सपोर्टरों का काफी ध्यान रखती है। उन्हें ऑर्डर दिलाने में भी मदद करती है। कई बार तो वह खुद ही उनका माल खरीद लेती है।
प्रतिकूल माहौल
आए दिन किसी न किसी कंपनी में बवाल होता है। शांति और सुरक्षा के माहौल का अभाव है। कुछ समय पहले उद्यमियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर औद्योगिक सुरक्षा दस्ता बनाने की मांग की थी। इस पर आश्वासन मिला था मगर अभी काम होना बाकी है।
क्या कहा उद्यमियों ने
सरकार की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बांग्लादेश और चीन की चुनौतियों ने गुड़गांव इस सेक्टर की नींव हिला कर रख दी है। एक्सपोर्ट गारमेंट सेक्टर में 30 फीसदी से भी अधिक की गिरावट है। अगर ऐसी ही स्थिति रही तो यहां से गारमेंट यूनिटों का पलायन हो जाएगा।
- परवीन यादव,अध्यक्ष, गुड़गांव उद्योग एसोसिएशन
गुड़गांव का उद्योग विहार कपड़ा उद्योग का बहुत बड़ा हब था। मगर अब यह बर्बादी की ओर अग्रसर है। कई कंपनियां तो हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की ओर जाने लगी हैं। उद्योग विहार में 65 फीसदी औद्योगिक प्लाट और साइट खाली पड़े हैं।
- किशन कपूर, चेयरमैन, हरियाणा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन
गुड़गांव में कपड़ा उद्योग की राह काफी चुनौतीपूर्ण है। प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति को किस प्रकार से लागू किया जाता है इससे पता चलेगा कि इस सेक्टर का भविष्य क्या है।
- एचपी यादव, एनसीआर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
प्रोडक्शन कॉस्ट दिनों दिन बढ़ रही है। इससे विश्व बाजार में कंपटीशन में टिकना मुश्किल हो रहा है। पहले क्रिसमस और नए साल पर गुड़गांव की कंपनियों को काफी ऑर्डर मिलते थे, मगर अब उनमें कमी आ रही है।
- संजय केडिया, एमडी, शिव एक्सपोर्ट्स
सरकार से मिलने वाली रियायतें
•वैट पर इनवेस्टमेंट सब्सिडी-वैट और स्टेट जीएसटी पर सात वर्षों के लिए 75 फीसदी की सब्सिडी
•बी और सी कैटेगरी के यूनिट के लिए अगले तीन वर्षों के लिए 35 फीसदी का प्रावधान किया गया है।
•अगले पांच वर्षों के लिए बी कैटेगरी को 50 फीसदी तक की सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
•एंप्लायमेंट जनरेशन सब्सिडी-हरियाणा के स्किल्ड, सेमी स्किल्ड वर्करों के लिए 10 हजार की सब्सिडी का प्रावधान।
•इनवेस्टमेंट सब्सिडी-एमएसएमई से संबंधित नई औद्योगिक इकाइयों के लिए टर्म लोन, विस्तार डायवर्जन के लिए छह फीसदी (अधिकतम 10 लाख रुपये प्रतिवर्ष)
•स्टांप ड्यूटी-लीज या खरीद के लिए 100 फीसदी स्टांप ड्यूटी रिफंड का प्रावधान किया गया है।
•कॉटन यार्न पर भी वैट सब्सिडी, पॉवर टैरिफ सब्सिडी, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में नई इकाईयों के लिए 10 वर्षों तक ड्यूटी में 100 फीसदी छूट का प्रावधान किया गया है।