फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंचकूला की फर्नीचर इंडस्ट्री ने चीन को पीछे छोड़ा

Sat, 21 Nov 2015 02:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
विज्ञापन
विज्ञापन
पंचकूला की फर्नीचर इंडस्ट्री अब चीन पर भारी पड़ रही है। इसके कारण मार्केट में चीन का शेयर अब सिर्फ बीस फीसदी रह गया है। कारण है इंडस्ट्री की लगन और उसकी क्वालिटी। अपनी इसी खूबी के कारण अब पंचकूला की इंडस्ट्री दुनिया में नाम कमा रही है।
विज्ञापन


इस इंडस्ट्री की मुसीबत है बिजली के बढ़ते दाम और फाइनेंस की समस्याएं। एक हजार करोड़ रुपये की इस इंडस्ट्री में अब सिर्फ रेडीमेड फर्नीचर ही नहीं मिलते बल्कि यह बड़े कारपोरेट हाउस के लिए कस्टमाइज फर्नीचर भी तैयार करते हैं। पंचकूला की साठ यूनिट्स में से कई यूनिट्स हैं जो फर्नीचर एक्सपोर्ट भी करने लगी हैं।

स्किल्ड लेबर की है कमी
फर्नीचर इंडस्ट्री के एक्सपर्ट बताते हैं कि इंडस्ट्री के पास काम तो है पर स्किल्ड लेबर की कमी है। जिसकी प्रमुख वजह है ट्रेनिंग न होना। आईटीआई जैसे संस्थान से स्किल्ड वर्कर तैयार जरूर होते हैं पर वह काम में उनके मुताबिक नहीं कर पाते हैं। जिसकी वजह से वेस्ट ज्यादा होता है। इसीलिए कई इंडस्ट्री स्किल्ड लेबर की खुद ट्रेनिंग करवाने लगी हैं और ट्रेनिंग के बाद रोजगार देती हैं।
विज्ञापन


बैंक नहीं करता है फाइनेंस
फर्नीचर इंडस्ट्री से जुड़े एक उद्यमी ने कहा कि बैंक फाइनेंस नहीं करता है जिसकी वजह से बिजनेस का प्रसार नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही शो रूम के ऊपरी हिस्से को बनाने के लिए बिल्डिंग बायलाज को देखना पड़ता है। जिसकी वजह से जगह का इस्तेमाल सही ढंग से नहीं हो पाता है।

आर्किटेक्ट की लेते हैं मदद
पंचकूला में फर्नीचर तैयार करने में डिजाइनिंग टीम का योगदान रहता है। इंडस्ट्री ने आर्किटेक्ट हायर किए हैं, जो कि पूरी डिजाइनिंग का ध्यान रखते हैं। यही आर्किटेक्ट फ्लैट्स और आफिस के लिए खास डिजाइनिंग करते हैं।

फर्नीचर इंडस्ट्री में लेबर एक बड़ी समस्या है। जरूरत है स्किल्ड लेबर को तैयार करने की। स्किल्ड लेबर हो तो परेशानी काफी हद तक कम हो सकती हैं।
- दिनेश कक्कड़, फोनिक्स फर्नीचर

बिजली और लेबर तो हमारी इंडस्ट्री की बड़ी समस्या है। हम अपनी क्वालिटी में कोई समझौता नहीं करते हैं, इसीलिए बेस्ट कारीगरों को रकते हैं। स्किल्ड लेबर हो तो बात बेहतर होगी।
- सनी उप्पल, होल्जर

फर्नीचर को सजाकर दुकान में रखना चैलेंजिंग है, क्योंकि हरेक की पसंद बदल चुकी है, कस्टमाइज फर्नीचर का दौर है, ऐसी स्थिति में समय पर डिलीवरी के लिए स्किल्ड लेबर होना चाहिए। इसके साथ ही फाइनेंस हमारी बड़ी समस्या है।
- एलवी गुलाटी, सदस्य हरियाणा चैंबर ऑफ कामर्स

फर्नीचर इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा चैलेंज फाइनेंस और बिजली है। बिजनेस का प्रसार करने के लिए फाइनेंस उपलब्ध हो तो यह बिजनेस ग्रूम कर जाएगा। हमारा फर्नीचर यूरोपियन कंट्री में एक्सपोर्ट होता है।
विज्ञापन

- कृष्ण गोपाल गुलाटी, मार्टिन फर्नीचर
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें