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टिंबर एंड प्लाईवुड इंडस्ट्री, डेढ़ दशक में शून्य से शिखर पर

Fri, 22 Jan 2016 01:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर
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हरियाणा के प्लाईवुड उद्योग ने सिर्फ डेढ़ दशक में शून्य से उठकर शिखर को छुआ है। इस प्रगति का श्रेय यमुनानगर के नवोन्मेशी उद्यमियों को जाता है, जिन्होंने छोटे कदमों से शुरुआत कर न सिर्फ सफलता की ऊंचाइयों को छुआ बल्कि उद्यम का एक ऐसा काफिला तैयार किया जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से दो लाख लोगों को रोजगार दे रहा है।
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प्लाई उत्पादन में यमुनानगर देश में पहले नंबर पर है। करीब 18 साल पहले जिले में प्लाईवुड इंडस्ट्री शुरू हुई थी। तीन राज्यों से सटा होने के कारण यहां प्लाई के निर्माण के लिए कच्चा माल आसानी से पहुंच जाता है। समय के साथ विस्तार हुआ आज यहां  प्लाई व बोर्ड बनाने वाली 300 इकाइयां हैं।

इन इकाइयों की जरूरतों को 284 पीलिंग, 505 आरा मशीनें व 56 चिपर इकाइयां पूरा कर रही है। पीलिंग फैक्ट्रियों में प्लाई निर्माण में इस्तेमाल होने वाला प्लाई पत्ता बनता है। आरा मशीनों में बोर्ड में लगने वाली लकड़ी की फट्टियां काटी जाती हैं। वहीं चिपर इकाइयों में प्लाई फैक्ट्रियों के लिए ईंधन तैयार किया जाता है। प्लाईवुड उद्योग करीब दो लाख लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार दे रहा है।
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तीन राज्यों से आता है पापुलर-सफेदा
प्लाई निर्माण के लिए पापुलर व सफेदा कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होता है। हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल व पंजाब के करीब एक लाख किसान पापुलर व सफेदा लेकर यहां आते हैं। इसकी खरीद फरोख्त यमुनानगर के अलावा जगाधरी की लक्कड़ मंडी में की जाती है। दोनों मंडियों में प्रतिदिन औसत 40 हजार क्विंटल पापुलर व सफेदा की खरीद होती है। लक्कड़ मंडियों के साथ करीब 800 आढ़ती जुड़े हुए हैं। वहीं, प्लाई, पीलिंग व चिपर फैक्ट्रियों तथा आरा मशीनों में करीब एक लाख श्रमिक काम करते हैं।

दिक्कतें- रियल एस्टेट में मंदी का असर
प्लाई फैक्ट्रियों में बनने वाली प्लाई व बोर्ड की करीब 60 प्रतिशत खपत रियल एस्टेट में होती है, लेकिन पिछले करीब एक साल से रियल एस्टेट के कारोबार में मंदी आई है। इस कारण प्लाई व बोर्ड की डिमांड कम हो गई है। इसका असर प्लाई फैक्ट्रियों के अलावा उससे जुड़ी अन्य इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। स्थिति यह है कि प्लाइवुड इंडस्ट्री में उत्पादन करीब 40 प्रतिशत कम हो गया है। जिन फैक्टरी में 24 घंटे काम होता था, वहां पर अब आठ से 10 घंटे ही काम होता है। जबकि निर्माताओं को बिजली का फिक्स चार्ज व टैक्स उतना ही है, इसलिए लागत बढ़ गई है।

फिक्स टैक्स 9 लाख से बढ़ाकर 11.70 लाख हुआ
प्लाई निर्माताओं का कहना है कि पिछले डेढ़ साल में प्लाई के दाम करीब 25 प्रतिशत गिरे है। इस कारण पापुलर के दामों में भी करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है। इस दौरान ही प्रदेश सरकार ने प्लाई इंडस्ट्री पर लगने वाले टैक्स में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी कर दी है। इससे उद्योग पर दोहरी मार पड़ी है। पहले प्लाई फैक्टरी मालिक को नौ लाख रुपये प्रति प्रैस लमसम (फिक्स)टैक्स देना होता था, जिसे बढ़ा कर 11.70 लाख रुपये कर दिया गया है।

झटका दे रहे हैं बिजली के बिल
एक साल में ही बिजली के दाम करीब 35 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। बिजली निगम करीब 11 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिल वसूल रहा है।  एक साल पहले निगम की ओर से आठ रुपये प्रति यूनिट बिल चार्ज किया जाता था। इसमें बिजली की प्रति यूनिट कीमत, फ्यूल सरचार्ज व अन्य टैक्स शामिल हैं। निगम ने एक साल में ही दो बार दाम बढ़ाए हैं। उद्यमियों के मुताबिक एक साल पहले करीब सवा रुपये यूनिट की बढ़ोतरी की गई, जबकि ढाई महीने पहले डेढ़ रुपये प्रति यूनिट की फिर से बढ़ोतरी कर दी गई। दूसरी ओर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व केरल में इस इंडस्ट्री के लिए बिजली रेट 4 रुपये प्रति यूनिट हैं।

श्रमिकों का अभाव
प्लाईवुड उद्योग के लिए श्रमिक जुटाना भी बड़ी समस्या है। पूर्वोत्तर राज्यों से आए 50 हजार से अधिक श्रमिक प्लाई फैक्ट्रियों, पीलिंग मशीनों, चीपर टोका मशीनों व 505 आरा मशीनों पर लगे हैं। तीज-त्योहार पर श्रमिकों के घर लौटने पर कारोबार थम जाता है और कारोबारियों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।

लाइसेंस न मिलना
पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पिछले कुछ सालों से प्लाई फैक्ट्रियों के लाइसेंस बंद कर दिए गए हैं। इससे उद्योग में नए लोग नहीं जुड़ पा रहे हैं और बरसों से इससे जुड़े उद्योगपति भी प्रतिस्पर्धा के बीच उद्योग से हाथ खींचने लगे हैं।

सरकार से उम्मीद- एक्साइज ड्यूटी में छूट मिले
सरचार्ज मिला कर एक्साइज ड्यूटी करीब 14 प्रतिशत तक वसूली जाती है। इससे लागत बढ़ती है। एक्साइज ड्यूटी घटाकर चार फीसदी की जानी चाहिए। एक्साइज छूट सीमा भी बढ़ाई जानी चाहिए।

इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिले
इनपुट टैक्स क्रेडिट को पूरा फायदा देने की मांग लंबे अर्से से की जा रही हैं। प्लाई निर्माता माल बनाने में प्रयोग होने वाले कैमिकल खरीदते हैं, जिन पर टैक्स देते हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट के तौर पर इन पर कुल 12 प्रतिशत तक छूट मिलती है, जबकि यह छूट वास्तविक आधार पर मिलनी चाहिए।

मदद मिलें तो निर्यात भी संभव
प्लाई निर्माताओं का मानना है कि चाइना की प्लाई सस्ती होने के कारण इसका विश्व भर में निर्यात हो रहा है।सरकार मदद करें तो जिले की प्लाई इंडस्ट्री विदेश में धाक जमा सकती है। इसके लिए सरकार को लाइसेंस प्रक्रिया का सरलीकरण, कम ब्याज पर पूंजी की उपलब्धता व श्रम कानूनों में ढील देनी पड़ेगी।

पीलिंग उद्योग को मिली संजीवनी
पीलिंग उद्योग भी पिछले कुछ समय से मंदी की मार झेल रहा है। इस उद्योग के साथ करीब 20 हजार श्रमिक जुड़े हुए हैं। सरकार ने अब इस उद्योग को संकट से उबारने की दिशा में कदम बढाया है। पीलिंग लाइसैंस धारकों को अब प्रैस लगाने के लाइसैंस जारी कर दिए हैं। इससे यह उद्योग रफ्तार पकड़ सकता

सफेदा और पापुलर के रेट गिरे
पापुलर व सफेदा की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद थी। एक साल पहले तक पापुलर का दाम 900 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया था, जो अब 500 रुपये प्रति क्विटंल है। इसी प्रकार सफेदा भी पिछले साल 850 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा था, जो अब 550 रुपये प्रति क्विटल हैं। रेट गिरने से किसानों में भारी मायूसी है। जिन किसानों ने अपने खेतों में पापुलर व सफेदा लगा लिया है, वे अब जल्द से जल्द इसे निकालना चाहते हैं ताकि खेत में कोई दूसरी फसल लगाई जा सके।

क्या कहते हैं उद्योगपति......
प्रदेश सरकार ने फिक्स टैक्स बढ़ाकर गलत समय पर गलत फैसला किया है। इस समय प्लाई उद्योग में मंदी छाई है। इस उद्योग को संकट से उबारने के लिए सरकार को टैक्स में कमी करनी चाहिए।
- जुगल किशोर बियानी, महासचिव, हरियाणा प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन

दूसरों राज्यों में टैक्स में बढ़ोतरी नहीं हुई। वहीं हरियाणा में एक साथ 30 प्रतिशत तक टैक्स में बढ़ोतरी की गई है। इससे हमारे यहां लागत बढ़ेगी। इस वजह से दूसरे राज्यों से प्रतिस्पर्धा करने में और मुश्किल होगी।
- सतीश चोपाल, वाइस प्रेजीडेंट, हरियाणा प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन

इस समय बाजार में डिमांड नहीं है। प्रोडक्शन कम होने से फिक्स कॉस्ट बढ़ रही है, जिसका असर लागत पर पड़ रहा है। लकड़ी के दाम में कुछ कमी है, मगर उसकी कसर फेस व गूल की बढ़ी कीमतों ने पूरी कर दी है।
- संदीप गंभीर, प्लाइवुड निर्माता (फोटो नंबर-तीन)

सरकार प्लाई, पीलिंग और आरे के लाइसेंस खोल दे तो इससे प्लाई व बोर्ड का उत्पादन बढेगा। इसका सीधी लाभ किसानों को होगा। इसके अलावा पापुलर को वन विभाग के दायरे से मुक्त किया जाना चाहिए।
- अशोक गुर्जर, प्रधान, पापुलर-सफेदा संगठन

पीलिंग उद्योग पिछले डेढ़ साल से मंदी की मार झेल रहा था। अब सरकार ने पीलिंग लाइसेंस धारकों को प्रैस लगाने की अनुमति दे दी है। उम्मीद है इससे यह उद्योग पनप पाएगा।
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- बलिंद्र चौधरी, प्रधान, यमुनानगर-जगाधरी पीलिंग एसोसिएशन
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