पानीपत में हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा आज जिले ही नहीं बल्कि देश के 25 ख्यातनाम उद्यमियों में पहचान रखते हैं। रमेश वर्मा को हैंडलूम उद्योग व एसोसिएशन की प्रधानी विरासत में नहीं मिली, बल्कि इसको लेकर खुद मेहनत और समर्पण से काम किया।
गांव करहंस में जन्मे और वहीं पर पले व बढ़े रमेश वर्मा ने बताया कि उन्होंने 1974 में उनके मन में एक्सपोर्ट करने का विचार आया, जबकि उस वक्त एक्सपोर्ट का कखग तक पता नहीं था। ऐसे में फैक्टरी व एक्सपोर्ट हाउस में नौकरी और ठेकेदारी की और वर्ष 1979 में साझेदारी में हैंडलूम का काम शुरू किया।
आठ साल तक इसी तरह से काम चलता रहा। उन्होंने 1996 में खुद का अलग से एक्सपोर्ट का काम शुरू किया। सुनार डायमंड को साफ सुथरा मानता है। ऐसे में उन्होंने अपने एक्सपोर्ट हाउस का नाम भी डायमंड रखा। धीरे-धीरे काम बढ़ा और इसके साथ नाम भी।
आज उनके एक्सपोर्ट हाउस में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से 1500 लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने अपने बेटे सुनील वर्मा को लंदन में पढ़ाया लिखाया। वे आज स्वीडन में मार्केटिंग देखते हैं। बेटी सपना वर्मा को पर्ल एकेडमी फेशन डिजाइनिंग दिल्ली में पढ़ाया और वे टैक्सटाइल डिजाइनिंग में ख्याति प्राप्त हैं और आज डवलपमेंट का काम संभाले हुए हैं।
रमेश वर्मा पिछले छह साल से हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान बनते आ रहे हैं। चार साल से पानीपत टैक्स इंडस्ट्री कलस्टर डेवलपमेंट सोसाइटी के चेयरमैन हैं। इसके अलावा प्रदेश व केंद्र सरकार की पानीपत होम फर्निशिंग कलस्टर प्राइवेट लिमटेड के दो साल से चेयरमैन हैं।
केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ टैक्सटाइल एक्सपोर्टर एंड पैकेजिंग ब्रांउ बिल्डिंग के सदस्य हैं। इसमें पूरे देश के 25 उद्यमी सदस्य हैं। इनमें से एक पानीपत के रमेश वर्मा हैं।