फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्नीचर की बढ़ती मांग का फायदा उठाया और लगा दी इंडस्ट्री

Fri, 22 Jan 2016 02:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
विज्ञापन
विज्ञापन
शुरुआत से ही इन्हें बिजनेस में रुचि थी। वर्ष 1972 में लोगों की मांग को भांपते हुए छोटी सी पूंजी और कुछ ही कर्मचारियों के साथ स्टील फर्नीचर की इंडस्ट्री लगा डाली। कुछ वर्षों बाद पंचकूला में खुद के प्लॉट में आए और क्वालिटी पर फोकस कर सामान बनाने लगे।
विज्ञापन


शुरुआत से ही पुलिस को मुहैया कराए गए बैरिकेट्स, ट्रैफिक संतरी स्टूल और साइन बोर्ड के जरिए मार्केटिंग हुई। धीरे धीरे बिजनेस भी बढ़ने लगा। आज इनके स्टील फर्नीचर की डिमांड पंचकूला, चंडीगढ़ ही नहीं बल्कि हरियाणा, हिमाचल के साथ साथ सरकारी विभागों और स्कूल, कॉलेज में भी है। ये है एके इंडस्ट्री के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल कुमार के उद्यमी बनने की कहानी।

रुचि थी तो लगाई खुद की इंडस्ट्री
अनिल कुमार ने बताया कि शुरू से ही उनकी रूचि बिजनेस में थी। ऐसे में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें वर्ष 1972 में चंडीगढ़ में प्लॉट अलॉट हुआ तो उन्होंने स्टील फर्नीचर इंडस्ट्री लगाकर काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि उस दौरान मार्केट में स्टील फर्नीचर की काफी डिमांड थी। जिसके बाद उन्होंने ये काम शुरू किया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1981 में इसी के साथ साथ स्टील ट्रेडिंग का काम भी शुरू किया।
विज्ञापन


पुलिस को मुहैया कराए बैरिकेट्स और साइन बोर्ड
अनिल कुमार ने बताया कि वर्ष 1977-78 में चंडीगढ़ में ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए कोई ट्रैफिक टूल नहीं था। ऐसे में चंडीगढ़ पुलिस की मांग और सुझाव पर उन्होंने सबसे पहले ट्रैफिक संतरी स्टूल चंडीगढ़ पुलिस को बिना किसी दाम के मुहैया करवाए। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस को लोहे के बैरिकेट्स और साइन बोर्ड बनाकर भी दिए। अनिल कुमार ने बताया कि इससे उनके बिजनेस की पूरे चंडीगढ़ में मार्केटिंग भी हुई।

वर्ष 2000 में चंडीगढ़ से पंचकूला आए
अनिल कुमार ने बताया कि उन्होंने पंचकूला में अपनी फैक्ट्री किराये पर दे रखी थी। फैक्ट्री खाली होने के बाद वर्ष 2000 में उन्होंने चंडीगढ़ में अपनी यूनिट बंद कर पंचकूला में आ गए और स्टील फर्नीचर का ही काम शुरू किया। उन्होंने बताया कि पंचकूला में भी जनता के हित के लिए उन्होंने पंचकूला पुलिस को साइन बोर्ड और स्टील के बैरिकेट्स बनाकर दिए। क्वालिटी आधारित मैटीरियल बनाने की वजह से उनका बिजनेस बढ़ता चला गया।

आधुनिक मशीनें लगाने पर विचार
अनिल कुमार ने बताया कि गुड़गांव से मेकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद वर्ष 2015 में उनके बेटे शिवम गोयल ने भी रुचि के मुताबिक उनके साथ आ गए और बिजनेस में सहयोग करने लगे। उन्होंने बताया कि बिजनेस का विस्तार करने के लिए वे वुडन के साथ साथ आधुनिक मशीनें लगाने पर विचार कर रहे हैं। इसके लिए उनके बेटे काम भी कर रहे हैं।

इन जगहों से है डिमांड
अनिल कुमार ने बताया कि उनके यहां तैयार होने वाले स्टील फर्नीचर की डिमांड ट्राईसिटी ही नहीं बल्कि हरियाणा और हिमाचल में भी है। उन्होंने बताया कि करीब करीब सभी सरकारी विभागों से भी उनके पास स्टील फर्नीचर की डिमांड आती है। इसके अलावा स्कूल, कॉलेज और निजी संस्थानों को भी वे स्टील फर्नीचर सप्लाई करते हैं।
विज्ञापन


मैन्युफैक्चर
- सभी तरह का स्टील फर्नीचर
स्टील अलमारी, लाइब्रेरी अलमेटिका
फाइलिंग कैबिनेट, टेबल, चेयर, रैंक
चेयर, बेंच, गमला स्टैंड और साइन बोर्ड
सभी प्रकार का फैबरिकेशन
रोजगार- करीब नौ कर्मचारी

प्रोफाइल
अनिल कुमार, मैनेजिंग डायरेक्टर
कंपनी- एके इंडस्ट्री
स्कूलिंग- डीएवी स्कूल, सेक्टर-8, चंडीगढ़
ग्रेजुएशन- गवर्नमेंट कॉलेज, सेक्टर-11, चंडीगढ़
सदस्य- पंचकूला इंडस्ट्री एसोसिएशन, पंचकूला।

शिवम गोयल
स्कूलिंग- सेंट जॉन्स स्कूल, सेक्टर-26, चंडीगढ़
बीटेक- जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी, गुड़गांव
वर्ष 2015 से काम में पिता को सहयोग कर रहे हैं।

टिप्स
- किसी क्षेत्र में जाने से पहले जानकारी हासिल करें
- अनुभवी लोगों से सुझाव जरूर लें
- स्थान और जगह की जरुरत को ध्यान में रखें
- बजट और फाइनेंस को ध्यान में रखें
- मार्केटिंग पर भी ध्यान देना है जरूरी
- कर्मचारियों के साथ तालमेल भी जरूरी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें