हरियाणा के अंबाला में आजादी से पहले केमिकल एवं फार्मा इंडस्ट्री लग चुकी थी, जो आज हिमाचल प्रदेश की ओर पलायन कर रहा है। अनेक दवा निर्माता कंपनियां पालयन कर चुकी है और बची हुई इकाइयां भी वहीं शिफ्ट हो रही हैं। कारोबारी इसके लिए सरकारी की उद्योग विरोधी नीतियों को जिम्मेदार मान रहे हैं।
इतिहास
अंबाला में दवा उद्योग का विस्तार आजादी से पहले ही हो चुका था। सन् 1920 के आसपास देसी दवाओं का अंबाला में अच्छा खासा कारोबार था। धीरे-धीरे ये इंडस्ट्री ग्रोथ करती गई। आज अंबाला में आयुर्वेदिक व अंग्रेजी दवाएं बनाने, उसके बेचने की कई इकाइयां है।
अंबाला में दवा निर्माता कंपनियों की संख्या करीब 28 है, जबकि दवाओं के सीएंडएफ कारोबारी, डीलर्स, रिटेलर, होलसेलरों की संख्या 460 से ज्यादा है। अंबाला में दवा का कारोबार अच्छे स्तर पर होता रहा है और दूसरे राज्यों तक में अंबाला की दवाएं सप्लाई की जाती थी, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में इस कारोबार में गिरावट आई है।
अंबाला का दवा उद्योग हिमाचल शिफ्ट होता जा रहा है। आलम यह है कि बहुत सी दवा कंपनियां ऐसी है, जिनका कार्यालय या छोटी-मोटी वर्कशाप तो अंबाला में रह गई हैं, जबकि बड़ी-बड़ी इकाइयां हिमाचल के विभिन्न शहरों में स्थापित कर ली है। हरियाणा फार्मास्यूटिकल मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन के महासचिव व लघु उद्योग भारती फार्मा के चेयरमैन टीसी कंसल कहते है कि दवा उद्योग यहां से पालयन कर रहा है, तो इसकी वजह सरकार की पॉलिसी है।
उनके अनुसार हरियाणा में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की बिना वजह की पाबंदियां, टैक्स की मार, एक्साइज ड्यूटी, बिजली की बढ़ी दरें व अन्य बुनियादी समस्याओं की वजह से ही अंबाला के दवा उद्यमियों को यहां से पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हिमाचल ही नहीं, जम्मू-कश्मीर, उतराखंड यहां तक की पंजाब में भी इस उद्योग को लेकर सरकार की नीति काफी स्पष्ट और राहत भरी है।
यह हैं परेशानियां
-दवाओं के रेट को लेकर अभी तक काम नहीं हुआ
-पड़ोसी राज्यों द्वारा इंडस्ट्री को पैकेज देने के कारण इन राज्यों में उद्योग तेजी से पनप रहे हैं
-अस्पतालों में खुले रिटेल काउंटर कारोबार को नुकसान पहुंचा रहे हैं
-दवाओं में प्राफिट आफ मार्जिन स्पष्ट होना चाहिए ताकि नुकसान न हो
इस कारोबार में कागजी काम इतना उलझा हुआ है कि इंस्पेक्टरी राज बढ़ रहा है। किसी भी एक दवा की बिक्री के बाद कई कागजात रखने पड़ते हैं, जबकि यह कम हो सकते हैं। इसके अलावा कई ऐसे नियम हैं, जो इस कारोबार को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
-राजीव गोयल, प्रधान, अंबाला होलसेल केमिस्ट एसोसिएशन
दवा उद्योग को बचाने के लिए सरकार कुछ पैकेज तो घोषित करे। पहले हिमाचल सरकार ने पैकेज घोषित किया, तो इंडस्ट्री वहां पर शिफ्ट होने लगी। इसी तरह उत्तराखंड सरकार भी दवा उद्यमियों को राहत दे रही है। हरियाणा में भी सरकार दवा उद्यमियों के लिए कुछ पैकेज घोषित करें।
-टीसी कंसल, हरियाणा फार्मास्यूटिकल मैनुफैक्चरर एसोसिएशन के महासचिव