चंडीगढ़। चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान संचालन, उड़ान सुरक्षा और रात में लैंडिंग की सुविधाओं पर संसद में मुद्दा उठाया गया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सवाल करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में पुराने और महंगे नेविगेशन सिस्टम को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है, उनकी जगह आधुनिक उपग्रह आधारित तकनीक अपनाई जा रही है, लेकिन भारत में अब भी कई हवाई अड्डों पर पुरानी व्यवस्था जारी है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका, यूरोप, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सुरक्षित और अधिक प्रभावी मानी जाने वाली आधुनिक नेविगेशन प्रणाली को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग हवाई अड्डे पर हाल ही में पुराने प्रकार का नेविगेशन सिस्टम क्यों प्रमाणित किया गया। उन्होंने इसे वैश्विक मानकों के विपरीत कदम बताया।
इसके साथ ही सांसद ने चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रात में विमान उतरने की सुविधा, उपकरण आधारित लैंडिंग व्यवस्था, तकनीकी सीमाओं और परिचालन प्रतिबंधों को लेकर भी सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के महत्वपूर्ण हवाई अड्डे होने के बावजूद चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर मौसम खराब होने की स्थिति में उड़ानों को अक्सर रद्द या डायवर्ट करना पड़ता है जिससे यात्रियों को भारी परेशानी होती है।
वायुसेना के अंदर आता है चंडीगढ़ एयरपोर्ट
सरकार की ओर से जवाब में बताया गया कि चंडीगढ़ एयरपोर्ट भारतीय वायुसेना के अधीन है और यहां नागरिक उड़ानों की सुविधा वायुसेना के माध्यम से दी जाती है। जवाब में यह भी कहा गया कि एयर ट्रैफिक सेवाएं और नेविगेशन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं वायुसेना के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। इस मुद्दे के सामने आने के बाद चंडीगढ़ एयरपोर्ट की उड़ान सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर बहस और तेज हो गई है।