चंडीगढ़। स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में शहर के पिछड़ने पर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) में नगर निगम के खिलाफ नाराजगी है। आरडब्ल्यूए ने इसके लिए कोरोना वायरस के साथ-साथ नगर निगम अधिकारियों, सांसद, मेयर और पार्षदों को जिम्मेदार ठहराया है। आरडब्ल्यूए का कहना है कि समय-समय पर नगर निगम के साथ-साथ अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को शहर की समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। अब इसका खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ा। लोगों को कहना है कि शहर की सड़कें और कूड़े की समस्या गंभीर है, लेकिन इसे हमेशा हल्के में लिया गया।
अधिकारी और प्रशासन जिम्म्मेदार
शहर के स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने के लिए प्रशासन और नगर निगम के अफसर जिम्मेदार हैं। कभी एसी कमरों से बाहर निकलकर जमीनी स्तर पर जाकर नहीं देखा। शहर की सड़कों, गांवों, कॉलोनियों और इंडस्ट्रियल एरिया की हालत देखने पर चंडीगढ़ कभी पहले स्थान पर नहीं आ सकता। समस्या बताने पर भी समाधान नहीं किए गए। रिटायर कर्मचारियों को दोबारा रखकर काम लिया जा रहा है।
-ओपी वर्मा, प्रधान सेक्टर 20 आरडब्ल्यूए
आरडब्ल्यूए की कोई सुनवाई नहीं
आरडब्ल्यूए की बातों पर नहीं किया गया। यदि नगर निगम बात सुन लेता तो शायद स्थिति बेहतर होती। एमओएच को इतने पैसे दिए जा रहे हैं, लेकिन घास तक काटने के लिए कोई नहीं है। पार्कों में सरेआम कूड़ा फेंका जाता है। सीसीटीवी कैमरे या चेकिंग के लिए कोई होना चाहिए। इसके लिए मैनेजमेंट और एमओएच दोनों जिम्मेदार हैं।
-बीएस रंधावा, प्रधान सेक्टर 40 आरडब्लूए
कोरोना के कारण नहीं आ पाईं गाड़ियां
कूड़े का सेग्रिगेशन करने में लोगों ने पूरा सहयोग किया, लेकिन जो गाड़ियां आनी थीं, वह कोरोना के कारण रह गईं। नगर निगम अधिकारियों और आरडब्ल्यूए ने अपनी तरफ से अच्छे प्रयास किए, लेकिन कोरोना महामारी के कारण सभी का ध्यान इस तरफ हो गया। इससे लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान रुक गए। फरवरी महीने से सभी का ध्यान कोरोना महामारी से निपटने में लग गया।
-रजत मल्होत्रा, प्रधान सेक्टर-41 आरडब्ल्यूए
एप की समस्याओं का नहीं किया गया निवारण
स्वच्छता एप पर आने वाली समस्याओं का निपटारा सही तरीके से नहीं किया गया, यह एक बड़ा कारण है। लोग अपने शहर से बहुत प्यार करते हैं। सिटीजन फीडबैक में चंडीगढ़ को बेस्ट यूटी का अवार्ड भी मिला है। अधिकारियों से ज्यादा शहर के निवासियों ने अपनी जिम्मेदारी को निभाया है। अधिकारियों को जमीनी स्तर पर काम करने की बहुत आवश्यकता है।
-विनोद वशिष्ठ, प्रधान सेक्टर 22 आरडब्ल्यूए
सभी को भुगतना पड़ा खामियाजा
शहर की आरडब्ल्यूए ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है। हर मीटिंग में आरडब्ल्यूए ने अपनी समस्याओं को उठाया है, लेकिन अधिकारियों ने उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। समस्याओं को छोड़कर कोरोना की तरफ ध्यान दिया गया। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। बारिश में घास खोदकर उसे उठाने वाला कोई नहीं है। इसी लापरवाही का खामियाजा पूरे चंडीगढ़ को भुगतना पड़ा है।
-विजय चकरसल, प्रधान 41 ए आरडब्ल्यूए
अफसरों और जनप्रतिनिधियों को चिंता नहीं
स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में इतना नीचे गिरना नगर निगम के लिए शर्मनाक है। डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा व गंदगी का पहाड़, उठती बदबू, प्रदूषण, सॉलिड वेस्ट का निस्तारण न होना, सड़कों के गड्ढे, बड़ी घास और आरडब्ल्यूए को साथ लेकर न चलना, इन सभी कारणों से चंडीगढ़ पिछड़ा है। इसके लिए अधिकारियों के साथ सांसद, मेयर और पार्षद सभी जिम्मेदार हैं। सभी ने शिकायतों को नजरअंदाज किया है।
-पंकज गुप्ता मुख्य प्रवक्ता, फॉस्वेक व अध्यक्ष, सेक्टर 38 वेस्ट आरडब्ल्यूए