इटावा लायन सफारी और चंडीगढ़ जियोलॉजिकल पार्क के एक शेर बीमार पड़ रहे हैं और उनकी बीमारी की वजह हैं चूहे हैं। आईवीआरआई की मुक्तेश्वर शाखा में जांच के लिए आए खून के नमूनों की जांच से पता चला है कि इन्हें लैप्टोस्पाइरा बीमारी है।
यह बीमारी इन्हें चूहे की यूरीन के इन्फेक्शन से हुई है। जांच करने के लिए आईवीआरआई बरेली के वाइल्ड लाइफ इंचार्ज डॉ. एके सिंह खुद चंडीगढ़ भी गए थे।
इटावा लायन सफारी में दो शेर इन दिनों बीमार हैं और लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल चंडीगढ़ के जियोलॉजिकल पार्क के शेर और तेंदुए का भी है।
चूहे के यूरीन से हुआ इंफेक्शन
खून के नमूनों की जांच के बाद डॉ सिंह ने बताया कि तीनों शेर और तेंदुए के सैंपल की जांच में लैप्टोस्पाइरा (बैक्टीरियल डिजीज) का टेस्ट पॉजिटिव और कैनाइन डिस्टेम्पर (वाइरल डिजीज) का टेस्ट निगेटिव आया है। यानी इनको लैप्टोस्पाइरा बीमारी हुई है।
यह बीमारी चूहे की यूरीन के इन्फेक्शन से हुई होगी। खाने के लिए दिए गए मीट या पानी में किसी तरह चूहे की यूरीन पहुंचने से यह इन्फेक्शन हो गया होगा।
उन्होंने बताया कि इस बैक्टीरियल इन्फेक्शन से लीवर और किडनी डैमेज हो जाती है और ज्यादा बढ़ने पर यह सेंट्रल नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित करता है।
इससे शेर हिलते-डुलते और झूमते हुए चलने लगता है। शेर और चीते के इलाज के लिए एंटीबॉयटिक देने की सलाह दी गई है। इस दवा से इनकी हालत में सुधार होगा।
एंटीबायोटिक देकर किया जा रहा इलाज
डॉ. सिंह के अनुसार यह बीमारी सिर्फ चूहे के अलावा किसी भी दूसरे रोडेंट (कुतरने वाले जीव) से हो सकती है। इसमें गिलहरी भी शामिल है। इसलिए यह जरूरी है कि इनके खाने-पीने की चीजों को चूहे, गिलहरी आदि से सुरक्षित रखा जाए।
शेर और चीते के सैंपल की जांच में एंटी बॉडी मिलने पर पहली ही नजर में साफ हो गया कि शेर और चीते की बॉडी में किसी एंटीजेन का प्रवेश हुआ है। गहराई से जांच की गई तो बैक्टीरियल डिजीज मिली। अब एंटीबॉयटिक देकर उनका इलाज किया जा रहा है।