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अफ्रीका के सबसे ऊंचे पर्वत किलिमंजारो पर चढाई करेंगी 7 स्कूली छात्राएं

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चंडीगढ़। हौसला बुलंद हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा तो बड़ी से बड़ी मंजिल की राह आसान लगती है। यह सही चरित्रार्थ किया है भारत की सात बेटियों ने। इन्होंने अफ्रीका के सबसे ऊंचे पर्वत किलिमंजारो पर चढ़ाई का मन बनाया है। ये हैं द लारेंस स्कूल सनावर की 7 छात्राएं जो सबसे कम उम्र में इतिहास रचने जा रही हैं। स्कूल के हेडमास्टर विनय पांडे ने बुधवार को प्रेस वार्ता में बताया कि इस ऐतिहासिक यात्रा पर जाना एक बहुत ही बहादुरी का काम है। यह सभी छात्राएं वीरवार को मुंबई से अफ्रीका के लिए रवाना होंगी।
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उन्होंने बताया कि स्कूल द्वारा यह फैसला स्टूडेंट्स के जोश और जज्बे को देखकर उठाया गया। स्टूडेंट्स ने इस पूरी यात्रा के लिए कठिन परिश्रम किया है। उन्होंने तीन चरणों में चढ़ाई को लेकर तैयारी की है। कैंप का मकसद स्टूडेंट्स को एक जीवन में कुछ नया करने का मौका देना है। इस दौरान हीरो मोटर्स कंपनी के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज एम मुंजाल भी उपस्थित रहे। गौरतलब है कि किलिमंजारो दुनिया का सबसे ऊंचा फ्री स्टैंडिंग माउंटेन है और इसकी चढ़ाई में 5 से 9 दिन का समय लगता है, जो कि इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन सा रूट लिया है। ज्वालामुखी वाले इस पर्वत की ऊंचाई सतह से 4,900 मीटर है।
यह छात्राएं फतह करेंगी किलिमंजारो
इस यात्रा पर जाने वाली छात्राओं में इश्मप्रीत कौर (17 वर्ष, लुधियाना), रोशनी (19 वर्ष, दिल्ली), अवंती अग्रवाल (15 वर्ष, सोलन), महिका गोयल (17 वर्ष, पालमपुर), अनन्या पंचहार (17 वर्ष, दिल्ली), मेगन भागीरत (17 वर्ष, कुल्लू-मनाली) तथा कशिश पठानियां (17 वर्ष, पठानकोट)। इस 11 दिनों के अभियान की अगुवाई मेजर प्रिया झिंगान करेंगी, जबकि ग्रुप की इंचार्ज प्रिया ढिल्लन (48) हैं। इस पूरे अभियान को अजीत बजाज तकनीकी सहयोग देंगे, जो द लॉरेंस स्कूल के पूर्व छात्र और एक जाने-माने ट्रैकर हैं और पद्मश्री से सम्मानित हैं। मई 2018 में बजाज ने अपनी बेटी के साथ माउंट एवरेस्ट पर एक अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया और बाद के वर्ष में सफलतापूर्वक अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचे।
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फिजिकल व मेंटल फिटनेस को बनाया अभियान का आधार
इस पूरे अभियान के लिए शुरुआत में 10-12 लड़कियों को उनकी रुचि और फिटनेस टेस्ट के आधार पर चुना गया। फाइनल टीम में शामिल होने के लिए लड़कियों की परफॉर्मेंस और उनकी फिजिकल व मेंटल फिटनेस को आधार बनाया गया। स्कूल में अनिवार्य ट्रेकिंग और हाइकिंग प्रोग्राम है और लड़कियों के पूर्व ट्रैकिंग संबंधी अनुभव ने इस परफॉर्मेंस में बड़ी भूमिका निभाई है। चयनित लड़कियों का बेहद कठोर तैयारी प्रशिक्षण हुआ है जिसकी शुरुआत फरवरी से ही हो गई थी। प्रशिक्षण के दौरान इन छात्राओं ने ऋषिकेश और लद्दाख में आयोजित 2 कैंपों में भी हिस्सा लिया।
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