पंजाब सरकार पंजाबी मां-बोली और अमीर सभ्याचार को और प्रफुल्लित करने के लिए वचनबद्ध है। इस कड़ी में भाषा विभाग के खाली पद भर कर इसका कायाकल्प किया जाएगा।
यह विचार शिक्षामंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने शिवालिक स्कूल में व्यक्त किए। इससे पहले उन्होंने भाषा विभाग द्वारा शुरू किए पंजाबी सप्ताह का झंडा फहरा कर उद्घाटन किया।
मलूका ने कहा कि पंजाबी को और प्रफुल्लित करने के लिए विद्वानों एवं साहित्यकारों के सुझाव लिए जाएंगे और उन्हें अमलीजामा पहनाया जाएगा।
वर्ष 2011 एवं 2012 के लिए साहित्यकारों, लेखकों, कवियों व बुद्धिजीवियों को पुरस्कार देने के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा। पुरस्कार राशि को भी दोगुना किया गया है। मार्च-14 से पहले पुरस्कार दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में कामकाज पंजाबी में करना यकीनी बनाया है। विधानसभा की कार्यवाही भी अब पंजाबी में की जाती है। दुनिया में 14 करोड़ लोग पंजाबी बोलते हैं।
बेशक इस दौर में हमें दूसरी भाषाओं के ज्ञान की जरूरत है, परंतु हमें अपनी मां-बोली को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। पंजाबी यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. जसपाल सिंह ने कहा कि डेढ़ सौ मुल्कों में बोली जाने वाली पंजाबी भाषा का दुनिया में 12वां स्थान है। परंतु पंजाबियों में पंजाबी साहित्य पढ़ने की घटती रुचि चिंता का विषय है। पंजाबी के नाम पर टीवी कार्यक्रम पंजाबी सभ्याचार पर कलंक हैं।
डॉ. गुरबचन सिंह राही ने भी समागम को संबोधित किया। शिक्षामंत्री ने भाषा विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन किया। जसवंत सिंह कंवल, एएस भुल्लर, गुरबख्श सिंह, सुरिंदर सिंह गिल, मोहन सिंह को सम्मानित किया।
विभाग की डायरेक्टर डॉ. बलबीर कौर ने सभी का स्वागत किया और पंजाबी सप्ताह के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर जीएस घुम्मन, हरजिंदर कौर, निरपिंदर सिंह रतन, गुरनाम सिंह बिजली, मनमोहन सिंह दाऊं भी मौजूद थे।