करनाल निवासी मां ने गर्भस्थ शिशु के जन्म के बाद जीवित न रहने की रिपोर्ट आने के बाद हाईकोर्ट से गर्भपात की अनुमति मांगी है। हाईकोर्ट ने पीजीआई मेडिकल बोर्ड को महिला की जांच कर सीलबंद रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
महिला की ओर से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि उसका 20 सप्ताह का गर्भ था जब उसे पता लगा कि उसके पेट में पल रहा बच्चा जन्म लेने के बाद जीवित नहीं रह पाएगा। यदि जन्म लेने वाला बच्चा जीवित ही नहीं रह पाएगा तो जन्म देने का औचित्य नहीं है।
महिला ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के बाद वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती और गर्भपात के लिए हाईकोर्ट की अनुमति चाहिए। कानून के अनुरूप 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ की स्थिति में उसके गर्भपात के लिए हाईकोर्ट की अनुमति अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने अब पीजीआई चंडीगढ़ को आदेश दिया है कि वह महिला की जांच करें और यह देखें कि यदि उसका गर्भपात करने की अनुमति दी जाती है तो कहीं उसके स्वास्थ्य को कोई खतरा तो नहीं। पीजीआई की रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट आवश्यक आदेश जारी करेगा।