चंडीगढ़। तू कितनी अच्छी है.. तू कितनी भोली है.. प्यारी प्यारी है.. ओ मां.. ओ मां..। भले ही इस गीत के बोले पुराने हो, लेकिन ये हर मां की ममता को बयां कर देता है। जिंदगी में सबसे खूबसूरत रिश्ता मां का होता है। माता की ममता का कोई मोल नहीं है। आज मदर्स डे है.. यह दिन खास है। कोरोना वायरस के बीच कुछ माएं मानवता की सीख भी दे रही हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा किए।
गरीबों को भूख देख तड़प जाता है दिल
छह साल की दो बेटियों को रोजाना घर पर छोड़कर जाना मुझे दुख भी होता है। लेकिन फिर दिल गरीबो को एक वक्त की रोटी खिलने के लिए दिल तड़प जाता है। मैं बापूधाम कॉलोनी में रहती हूं। यहां इन दिनों कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा केस आ रहे हैं। ऐसे में यहां लोगों को पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए दवाई दे रही हूं। इसके अलावा जहां लोगों को खाना नही मिल रहा है वहां खाना दे रही हूं। मेरी बस छोटी सी कोशिश है। हां कई बार बाहर जाते हुए डर लगता है, पर फिर लोगों के हाल को देखकर मैं खुद को समाज सेवा के लिए रोक नहीं पाती।
-पिंकी रानी, बापूधाम कॉलोनी
गरीब महिलाओं और लोगों को 39 दिन चलाया लंगर
मैं एक मां हूं और मां की ममता किसी के बीच भेदभाव नहीं करती। कोरोना वायरस के बीच जब लोगों को भूखे देखा तो मेरा दिल पसीज गया। मैं अपने पति अतुल शर्मा के साथ 39 दिनों से गरीब महिलाओं और जरूरतमंद लोगों को लंगर लगा रही हूं। हमारा प्रयास यही रहता है कि कोई भूखा न जाए।
-जसविंदर सोनिया, पंचकूला
सच्ची लगन एवं मेहनत से कुछ भी असंभव नहीं
जिंदगी में महिलाओं के जीवन में बहुत उतार चढ़ाव आते हैं। अगर महिलाएं सच्ची लगन एवं अपनी मेहनत से किसी कार्य को करने की ठान ले तो वो सबकुछ कर सकती है यह बात पंचकूला की रहने वाली समाज सेविका पूनम सहगल एवं उनकी पुत्री ज्योति सहगल एवं बहु पारिका सहगल ने कही। उन्होंने बताया कि वे तीनों हर कार्य को एक दूसरे की मदद से पूरा करते हैं। पूूूनम सहगल ने बताया कि लोग अक्सर कहते हैं मेरी बेेटी मेेेरा अभिमान, पर मैं कहती हूं. मेरी बहु मेेेेरा अभिमान। पारीका सहगल ने बताया कि उन्हें शादी के बाद कभी अपने मायके की याद नहीं आई। उन्हें सास के रूप में मां मिली है। पूनम सहगल ने बताया कि सामाजिक कार्य की शुरुआत शादी के बाद शुरू हुई।
गरीब महिलाओं को निशुल्क दवाएं देती हैं नीता
कोरोना वायरस के बीच नीता शर्मा गरीब लोगों खासकर महिलाओं को नि:शुल्क दवाई दे रही हैं। साथ ही जरूरतमंदों की मदद भी कर रही हैं। उन्होंने कहा, मानव सेवा ही सच्ची सेवा है। मौजूदा दौर में सभी को एक दूसरे की सेवा करनी चाहिए, ताकि सभी इस कठिन घड़ी से उबर सकें।