पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पति द्वारा दाखिल तलाक याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि सास-बहू के मामूली झगड़ों को बहु की परिवार के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता। मोगा के एक मामले में याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट में पति ने कहा था कि उसका विवाह 2004 में हुआ था और उसके बाद 2005 में उन्हें एक बेटा हुआ। विवाह के बाद से ही उसकी पत्नी का बर्ताव उसके प्रति बहुत खराब रहा।
याची की मां से भी पत्नी बहुत बुरा बर्ताव करती थी और इसके चलते याची की मां हमेशा परेशान रहती थी। इसके साथ ही जब याची के बेटे का मुंडन हुआ तो याची को इसकी सूचना तक नहीं दी गई। इसके विपरीत पत्नी की ओर से कहा गया कि याची द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उल्टा उसके साथ चाची व उसकी मां बुरा बर्ताव करती थी। दहेज के लिए उसे परेशान किया जाता था और अक्सर उसकी पिटाई भी की जाती थी।
साथ ही यह भी बताया कि याची और उसके परिवार को मुंडन के बारे में जानकारी दी गई थी लेकिन कोई आवश्यक कार्य के कारण वे लोग मुंडन में शामिल नहीं हो सके। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि पति द्वारा लगाए गए आरोप सामान्य और झूठे लगते हैं।
केवल यह कह देने से की पत्नी उसके और उसके परिवार के प्रति क्रूर है पत्नी को क्रूर साबित करने के लिए काफी नहीं है। भले ही याची ने पत्नी के दिमागी इलाज से जुड़ा रिकार्ड पेश किया है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि पत्नी याची और उसकी मां के प्रति क्रूर थी। सास-बहू के मामूली झगड़ों को तलाक का आधार किसी भी स्थिति में नहीं माना जा सकता।
ऐसे में पत्नी की क्रूरता को साबित करने में पति नाकाम रहा और तलाक के लिए पर्याप्त कारण नहीं पेश कर सका। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने पति की तलाक से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया।