स्कूल बैग टांगे बच्चे (फाइल फोटो)
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दो साल से ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले ज्यादातर बच्चों के साथ ही अब उनके अभिभावक ऑफलाइन शिक्षा को ज्यादा बेहतर मानते हैं। ऐसा इस वजह से कतई नहीं है कि ऑनलाइन शिक्षा में कोई कमी है, बल्कि ऐसा इस वजह से है क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई के चलते बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पा रहा है।
पंचकूला में करीब 70 फीसदी अभिभावक ऑफलाइन शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि उनका मानना है कि कोरोना के दौर की वजह से यह स्कूलों और अभिभावकों की मजबूरी है कि बच्चों की ऑफलाइन शिक्षा नहीं हो सकती। 30 फीसदी अभिभावकों का कहना है कि ऑनलाइन शिक्षा ठीक है, पर इसमें अनुशासन को ज्यादा बढ़ाया जाना चाहिए।
पंचकूला में 30 फीसदी बच्चों का भी कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई ठीक है, पर इससे उनकी कई गतिविधियों पर रोक लग गई है। वहीं, 40 फीसदी बच्चों का कहना है कि स्कूल में पढ़ाई बेहतर है। ऑनलाइन शिक्षा के कारण वह पूरे दिन घर पर होते हैं, इस वजह से ज्यादा सक्रिय नहीं हो पाते हैं। वहीं 20 फीसदी बच्चे ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही प्रकार की पढ़ाई से संतुष्ट हैं।
पंचकूला की एक अभिभावक तनु गुप्ता ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई अच्छी है, पर मुझे लगता है कि ऑफलाइन शिक्षा ज्यादा समझ में आती थी। ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से बच्चे कम सतर्क हैं। अभिभावक ज्योति के अनुसार करीब दो साल से बच्चे घर में हैं। इससे उनका विकास रुक गया है। अभिभावक सुमित के अनुसार सबसे बड़ी समस्या बच्चों को न खेलने को मिलता है न वह पढ़ाई पर ज्यादा केंद्रित हो पाते हैं। इस ऑफलाइन शिक्षा अधिक कारगर है।
वहीं, अभिभावक जगमीत के अनुसार ऑनलाइन पढ़ाई में कोई हर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी इसमें कुछ त्रुटियां हैं और अगर इन्हें ठीक किया जाए तो यह शिक्षा काफी कारगर साबित हो सकती है।