चंडीगढ़। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा सेवानिवृत्त डॉक्टरों की सेवाएं लेने संबंधी अपील पर ऐसे डॉक्टरों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। सेवानिवृत्त डॉक्टरों का कहना है कि महामारी में अब तक के रिकॉर्ड बताते हैं कि 60 साल से ज्यादा उम्र वालों में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। इसके साथ ही इस उम्र के पॉजिटिव लोगों की मृत्यु दर भी अन्य उम्र वालों की तुलना में ज्यादा है। ऐसी स्थिति में प्रशासन इस उम्र के डॉक्टरों से कोविड अस्पताल में एक्टिव ड्यूटी करने के लिए कैसे कह सकता है। सेवानिवृत्त डॉक्टरों ने कोविड-19 में ड्यूटी कराने की बजाय नए डॉक्टरों की नियुक्तियों पर ज्यादा फोकस रहने की सलाह दी है।
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष व वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के एडवाइजर डॉ. आरएस बेदी का कहना है कि इस अपील के संदर्भ में मंगलवार को सेवानिवृत्त डॉक्टरों से वार्ता की गई। इसके बाद यह बात सामने आई है कि महामारी में अगर डॉक्टर ड्यूटी करना चाहे भी तो उनके परिवार के सदस्य ऐसा नहीं करने देंगे, क्योंकि 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों पर संक्रमण का खतरा ज्यादा है। ऐसे में प्रशासन को उन्हें एक्टिव ड्यूटी में लगाने की बजाय कार्य योजना बनाने और प्रबंधन संबंधी कार्यों में मदद के लिए लगाना चाहिए। इससे वे अपने अनुभव का लाभ प्रदान करके महामारी से बचाव की तैयारियों को और मजबूती दे सकें। अगर उन्हें कोविड-19 अस्पताल की आईसीयू या वर्ड में सीधे तौर पर मरीजों के संपर्क में भेजा गया तो उनकी जान भी जोखिम में पड़ेगी।