चंडीगढ़। नगर निगम शहर की करीब 55 हजार स्ट्रीट लाइटों को नई तकनीक से बदलने की तैयारी में है। इस परियोजना का उद्देश्य सड़कों पर बेहतर रोशनी देना, बिजली की खपत कम करना और पूरे लाइटिंग सिस्टम को आधुनिक बनाना है। निगम के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने पर बिजली खपत में करीब 33 प्रतिशत तक कमी आएगी और शहर की सड़कें पहले से ज्यादा रोशन नजर आएंगी।
इस तकनीक की खास बात यह होगी कि वार्ड पार्षदों के मोबाइल पर उनके क्षेत्र की स्ट्रीट लाइटों का पूरा डेटा उपलब्ध रहेगा। वे देख सकेंगे कि कितनी लाइटें लगी हैं और कितनी चालू हैं। यदि 95 प्रतिशत से कम लाइटें जलती पाई गईं तो संबंधित कंपनी पर जुर्माना लगाया जाएगा। परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस बार एक स्वतंत्र इंजीनियर भी नियुक्त किया जाएगा, जो काम की निगरानी करेगा। उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही एजेंसी को भुगतान किया जाएगा। निगम जल्द ही रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी कर कंपनियों से आवेदन मांगेगा।
पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च होंगे जिसमें 50 करोड़ रुपये पूंजीगत लागत और 10 करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर खर्च किए जाएंगे। अनुमान है कि 10 वर्षों में करीब 23 करोड़ रुपये की बचत होगी।
नगर निगम के चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने 30 अप्रैल को सदन की बैठक में बताया था कि करीब आठ साल पहले ईईएसएल कंपनी की ओर से लगाई गई 100 ल्यूमेन प्रति वाट क्षमता वाली एलईडी लाइटें अब पुरानी हो चुकी हैं। वर्तमान में बाजार में 170 ल्यूमेन प्रति वाट तक की उन्नत तकनीक उपलब्ध है जिससे 18 वाट के स्थान पर 12 वाट में समान रोशनी मिल सकती है। निगम के अनुसार पहले ब्लैक स्पॉट की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर लाइटें लगाई जाएंगी ताकि सुरक्षा और रोशनी दोनों में सुधार हो सके।