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Chandigarh News: पढ़ाई के लिए नहीं थे रुपये, प्रियंका ने फिर भी जीता जहां

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चंडीगढ़। कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालों यारों... इस पंक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है सेक्टर-31 निवासी 21 वर्षीय प्रियंका ने। खुद की पढ़ाई के लिए रुपये नहीं थे लेकिन उन्होंने मेहनत कर अपने दम पर पढ़ाई पूरी की और आज ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। अब प्रियंका अपने जैसे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का भविष्य सुधारने में जुटी हैं।
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पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के पेक फेस्ट में पहुंचीं प्रियंका ने बताया कि उनका बचपन ?आर्थिक तंगी में गुजरा। पिता मजदूर थे औ मां घरों में काम करती थीं। घर खर्च चलाना मुश्किल होता था। ऐसे में उनकी स्कूल की फीस भरना बड़ी दूर की बात थी लेकिन उनकी आंखों में बड़े सपने थे। ऐसी स्थिति में वृद्धि सामाजिक संस्था का सहारा मिला। संस्था की संस्थापक प्रनीता विश्वास ने प्रियंका की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाई। बस यहीं से उनके सपनों को पंख लगे।
स्कूल शिक्षा के बाद इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से प्रियंका ने बीए की पढ़ाई की और साबित कर दिया कि जुनून और मेहनत इंसान की तकदीर बदल देता है। आर्थिक स्थिति को पार कर प्रियंका खुद को सशक्त करने के साथ बहुत से गरीब बच्चों का जीवन संवार रही हैं।
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जिसने मुश्किल समय में थामा हाथ आज चुका रही हैं उसका कर्ज
मुश्किल घड़ी में जो आपकी मदद करे वहीं सच्चा मित्र है। प्रियंका ने भी इस सिद्धांत को अपनाया और वृृद्धि सामाजिक संस्था में बतौर अध्यापिका काम कर रही हैं। पढ़ाई के दौरान उन्होंने आत्मरक्षा का गुर सीखना शुरू िकया। स्कूल के साथ संस्था ने उन्हें विशेष रूप से इसके लिए प्रशिक्षण भी दिलवाया। अब प्रियंका संस्था में अपने जैसे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को ताइक्वांडो, नृत्य सहित कई कलात्मक ज्ञान दे रहीं हैं।
सपनों को पंख लगाना लक्ष्य
वृद्धि सामाजिक संस्था की संस्थापक प्रनीता ने बताया कि वह एक निजी स्कूल में अध्यापिका थीं। समाज में होनहार बच्चों में पढ़ने की ललक तो थी लेकिन आर्थिक स्थिति उनके आड़े आ रही थी। ऐसे बच्चों को एक दिशा देने के लिए अपने बेटे के प्रोत्साहन के बाद वर्ष 2017 में संस्था की शुरुआत की। प्रनीता ने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि हम जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में लेकर आएं।
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