शहर में नगर निगम के पहले मेयर का चुनाव सीक्रेट बैलेट से करवाने की मांग की हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी।
इसके बाद साफ हो जाएगा कि यह चुनाव बैलेट पेपर के जरिए होगा या हाथ खड़े करवाकर। इस तारीख पर कोर्ट क्या निर्देश देता है इस पर दोनों प्रमुख पार्टियों और आजाद ग्रुप की निगाहें टिकी हुई हैं।
26 फरवरी को नगर निगम के चुनाव नतीजों के बाद सरकार ने हाथ खड़े करके मेयर का चुनाव करवाने की तैयारी कर ली थी। इसके खिलाफ पार्षद कुलजीत सिंह बेदी ने कोर्ट में केस दायर कर दिया था।
यही नहीं शहर के तीन पार्षदों अमरीक सिंह तहसीलदार, मनजीत सिंह सेठी और हरपाल चन्ना ने भी एक अन्य केस हाईकोर्ट में दायर किया हुआ है।
मेयर की सीट को सरकार की ओर से महिला के लिए रिजर्व करने संबंधी पार्षदों द्वारा दायर किए गए इस केस की सुनवाई 25 मार्च को होनी है। तब तक मेयर के चुनाव पर कोर्ट द्वारा रोक लगा दी गई थी।
मेयर बनाने के लिए दिलचस्प बनी स्थिति
शहर में नगर निगम के पहले मेयर को लेकर मुकाबला काफी रोमांचक है। अकाली-भाजपा और कंाग्रेस के अलावा आजाद ग्रुप भी मेयर पद को लेकर काफी कशमकश में है। चुनाव में शिअद-भाजपा गठजोड़ स्पष्ट बहुमत लेने में कामयाब नहीं हो पाया था।
शिअद के पास 17 और भाजपा के पास 6 पार्षद हैं, जिनका जोड़ 23 बनता है और यह स्पष्ट बहुमत से तीन कम है। वहीं कांग्रेस ने 14 सीटें अपने नाम की हैं, जो कि स्पष्ट बहुमत से काफी दूर है।
शहर में पहली बार बने आजाद ग्रुप ने 11 सीटें हासिल की हैं, जिसने दोनों प्रमुख पार्टियों शिअद-भाजपा और कांग्रेस की गेम खराब कर दी है।
चाहे शिअद-भाजपा गठजोड़ तीन आजाद पार्षदों के साथ होने का दावा कर रहा है पर हकीकत तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगी। फिलहाल शहर में चर्चा है कि आजाद ग्रुप और कंाग्रेस मिलकर मेयर बनाएंगे।