एक तरफ जहां पूरा देश मोगा बस कांड को लेकर शर्मसार है, वहीं प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री को यह घटना ‘भगवान की मर्जी’ लगती है। बस कांड के बारे में बात करते हुए रखड़ा ने कहा, ‘जो भी होएया रब दा भाणा (मर्जी) सी। आपां रोज सफर करदे हां, पता नहीं हुंदा, कित्थे की हो जावे। (जो हुआ, भगवान की मर्जी थी। हम रोज सफर करते हैं। पता नहीं होता, कहां क्या हो जाए)।
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इसके बाद रखड़ा की काफी आलोचना हुई तो वह बयान से पलट गए। रखड़ा ने कहा कि वह पंजाब में बेमौसम बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान के बारे में बोल रहे थे। मीडिया ने उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।
वहीं, दूसरी ओर मोगा के विधायक जोगिंद्र पाल जैन ने कहा कि इस घटना पर राजनीतिक पार्टियां निजी हितों के लिए बेटी की मौत पर राजनीति कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार राजीनामा करने के लिए तैयार है लेकिन पार्टियां स्वार्थवश राजीनामा नहीं होने दे रहीं।
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हमारी जान खतरे में है, सुरक्षा दें : सुखदेव
ऑर्बिट बस में सफर कर रही मां-बेटी से छेड़छाड़ के बाद फेंकने के मामले में घायल छिंदर कौर के पति सुखदेव सिंह ने शनिवार को मीडिया को बताया कि उनके परिवार की जान को खतरा है। उसने कहा कि उसे बाहर जाने से भी डर लगता है।
सुखदेव ने बेटी के कातिलों को मौत की सजा, ऑर्बिट बसें बंद करने और कंपनी के मालिक बादल परिवार के खिलाफ कार्रवाई की मांग के अलावा अपने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की।
सुखदेव ने राजनीतिक पार्टियां को इस मुद्दे पर राजनीति न करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि उसकी बेटी का अंतिम संस्कार होने के बाद बादल परिवार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए वह अकेला ही रह जाएगा। लेकिन इंसाफ मिलने तक अपनी बेटी का संस्कार नहीं करेंगे।
रखड़ा का पुतला फूंककर इस्तीफा मांगा
मोगा बस कांड पर कैबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा के बयान से भड़के यूथ कांग्रेसियों ने शनिवार को लीला भवन के सामने रोष प्रदर्शन किया। इस मौके पर रखड़ा का पुतला फूंका गया। साथ ही रखड़ा से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की।
यूथ कांग्रेस पटियाला देहाती प्रधान विनोद अरोड़ा कालू की अगुवाई में किए इस प्रदर्शन में आल इंडिया यूथ कांग्रेस के सचिव और बिहार व चंडीगढ़ यूथ कांग्रेस के इंचार्ज बीर दविंदर सिंह शम्मी सिद्धू विशेष तौर पर पहुंचे।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि एक तरफ मोगा बस कांड के खिलाफ पूरे देश में गुस्से की लहर है और देश भर में बादल परिवार के पुतले फूंके जा रहे हैं। दूसरी तरफ कैबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा इसे भगवान की मर्जी बता रहे हैं।
इससे साफ होता है कि बादल परिवार और बादल सरकार के मंत्री कितने गैर संवेदनशील हैं और किस हद तक गिर चुके हैं। कांग्रेसियों ने कहा कि रखड़ा को अपने इस शर्मनाक बयान के लिए नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
घटना पर राजनीति न करे विपक्ष : शिअद
शिअद की ओर से मोगा की घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात दोहराते हुए कहा गया कि विपक्षी दलों को इस मसले पर राजनीति से गुरेज करना चाहिए।
यह भी कहा है कि एक बच्ची की मौत पर राजनीति के तहत शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल के खिलाफ कार्रवाई की मांग हास्यस्पद है। दल के महासचिव महेशइंद्र सिंह ग्रेवाल ने एक बयान में कहा कि यह बेहद बेतुकी बात है कि कुछ कारिंदों के अपराध के बदले बस के मालिक के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की जा रही है।
उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार जिस व्यक्ति ने अपराध किया हो, कार्रवाई उसके खिलाफ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों की पीड़ित परिवार से कोई हमदर्दी नहीं है। यह सब केवल सियासी रोटियां सेंकने के लिए किया जा रहा है।
सांसद मान ने ऑर्बिट बसों का घेराव किया
आप के सांसद भगवंत मान ने ऐलान किया है कि पंजाब की सड़कों पर दौड़ रही ऑर्बिट बसों की धक्केशाही नहीं चलने दी जाएगी। उक्त ऐलान सांसद मान ने भवानीगढ़ स्थित फग्गूवाला कैचियां में लगाए रोष धरने दौरान किया।
इस दौरान पार्टी वर्करों ने आर्बिट बसों का घेराव किया। भवानीगढ़ में आप वर्करों द्वारा ऑर्बिट बसों के किए घेराव दौरान सांसद मान ने मौके पर उपस्थित डीटीओ करनजीत सिंह छीना को घेरी बसों की चेकिंग करने की हिदायत की।
इसके बाद डीटीओ छीना ने न्यू फतेह बस पीबी03एएफ-9036 और डबवाली बस नंबर पीबी03एकस-2300 के प्रेशर हार्न और स्टीरियो के चालान काटे। बता दें कि जिला संगरूर में बादल परिवार से संबंधित बसों का पहली बार चालान काटा गया। सांसद मान ने पार्टी वर्करों से कहा कि वह रोजाना बसों के चालान कटवाएंगे।
बादल में पीड़ित से मिलने की हिम्मत नहीं : बाजवा
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल गरीब व असहाय परिवार से व्यक्तिगत तौर पर हमदर्दी प्रकट करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार बादल परिवार के घरेलू क्षेत्र के रूप में जाने जाते एरिया का रहने वाला है। बाजवा के अनुसार मुख्यमंत्री की संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रत्येक नागरिक को सुरक्षा मुहैया करवाएं, लेकिन वह लोगों को सुरक्षा देने में नाकाम रहे हैं।
बाजवा ने कहा कि लड़की को साथी यात्रियों की मौजूदगी में बेरहमी से मारा जाना राज्य में कानून-व्यवस्था की असलियत बयां करता है। लोग सियासी शह हासिल गुंडों के खिलाफ बोलने से डरते हैं। बाजवा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल पंजाब के उपमुख्यमंत्री और हरसिमरत कौर बादल केंद्रीय मंत्री हैं।
इनमें से किसी ने भी परिवार से मिलने या न्याय का भरोसा देने की हिम्मत तक नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में निर्भया, उबेर टैक्सी सर्विस और उपहार सिनेमा के मालिकों के मामले की तर्ज पर कंपनी के एमडी सुखबीर सिंह बादल और अन्य डायरेकटरों के खिलाफ धारा-304ए के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। कानून के दो रूप नहीं हो सकते। सुखबीर बादल की कंपनियों की सभी बसों के परमिट रद्द होने चाहिए और राज्य में इन बसों को रोका जाना चाहिए।
मोगा कांड के बाद पंजाब के मुख्य सचिव को डिमांड नोटिस भेज कर सभी निजी बसों के परमिट ट्रांस्पोर्ट विभाग की वेबसाइट पर डालने की मांग की गई है। आरोप है कि आर्बिट बसें कई रूटों पर बिना परमिट दौड़ रही हैं। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि सात दिनों में जानकारी वेबसाइट पर नहीं डाली गई तो पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
नोटिस भेजने वाले एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने मुख्य सचिव के अलावा प्रमुख सचिव ट्रांस्पोर्ट और ट्रांस्पोर्ट कमिश्नर से भी यही मांग की है। नोटिस में आरोपा है कि ऑर्बिट को लेकर आम लोगों में अवधारणा बन चुकी है कि कंपनी मुख्यमंत्री के परिवार की होने के कारण ट्रांस्पोर्ट विभाग बसों की जांच नहीं करता।
इससे पहले शुक्रवार देर शाम एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर मांग की है कि ऑर्बिट बसों के स्टाफ की जांच होनी चाहिए कि वे कहीं नशा तो नहीं करते। इसके लिए ड्रग्स टेस्ट कराने की मांग की गई थी। नोटिस में निर्भया कांड के बाद दिल्ली में उबेर टैक्सी सर्विस पर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की तर्ज पर ऑर्बिट पर भी कार्रवाई मांगी गई थी।
हवाला दिया था कि सरकार ने उबेर टैक्सी सर्विस के ड्राइवरों की जांच शुरू की थी और जांच मुकम्मल होने तक टैक्सी सर्विस को रोक दिया गया था। नोटिस में मांग की थी कि ऑर्बिट के ड्राइवर, कंडक्टरों और हेल्परों की नशे की जांच हो और तब तक ऑर्बिट के चलने पर रोक लगाई जाए। ऐसा नहीं करने पर भी जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी दी गई थी।