बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की कसम खाने वाले डॉक्टरों ने महज चार दिन में ही बेटी बचाने की कसम को तोड़ दिया और इसी धरती पर पेट में बेटियों का मारना शुरू कर दिया। बापौली कस्बे में सोनीपत के स्वास्थ्य विभाग ने पोर्टेबल मशीन से अल्ट्रासाउंड करने के मामले का भंडा फूटते ही कई सच्चाइयां सामने आ गईं। उक्त क्लीनिक संचालक की डिग्री भी फर्जी मिली और पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर क्लीनिक संचालक के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया।
गौरतलब है कि सोनीपत के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शनिवार को बापौली कस्बे में पोर्टेबल मशीन से अल्ट्रासाउंड कर लिंग जांच करने का भंडाफोड़ किया था। मामले के सामने आने से पहले क्लीनिक संचालक मशीन के साथ फरार हो गया था। बताया जा रहा है कि सोनीपत के स्वास्थ्य विभाग को सूचना मिली थी कि कन्या भ्रूण हत्या का धंधा चल रहा है।
इसमें कुछ एजेंट और एएनएम भी शामिल हैं। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने टीम का गठन किया। उन्होंने आशा वर्कर व उसकी बेटी को ग्राहक बनाया और एक एएनएम के पास भेजा। जिसको लेकर 11 हजार रुपये में बात तय हुई।