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22 हजार शिक्षकों के लिए मुसीबत बने पीएम मोदी

Tue, 02 Sep 2014 05:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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22 हजार स्कूल के शिक्षक परेशान
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शिक्षक दिवस पर हर स्कूल में टीचरों की महिमा का गुणगान किया जाता है। उनके योगदान के लिए आभार जताया जाता है। लेकिन पंजाब के टीचरों के लिए इस बार का शिक्षक दिवस मुसीबत बन गया है।

पांच सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों को संबोधित करेंगे। बच्चों को भाषण दिखाने की पूरी जिम्मेदारी विभाग ने टीचरों पर डाल दी है। टीचरों के लिए इंतजाम करना मुश्किल हो गया है।
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जिन स्कूलों में एजुसेट लैब या कंप्यूटर लैब है, वहां कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन राज्य के 22 हजार से ज्यादा स्कूलों में टीवी पर भाषण दिखाना है। टीवी, सेट टॉप बॉक्स और जनरेटर का इंतजाम टीचरों को खुद करने को कहा गया है।

शिक्षक दिवस को लेकर टीचर परेशान

टीवी और सेट टॉप बॉक्स किराए पर मिलते नहीं हैं। धान के सीजन के चलते पूरे पंजाब में जनरेटर पहले ही किसानों ने किराए पर ले रखे हैं। अब टीचर असमंजस में हैं कि क्या करें।

जिसके बाद विभाग ने एक और सुझाव दिया कि स्कूलों के साथ लगते किसी घर से टीवी और केबल स्कूल में लगवा लें या फिर गांव के सरपंच, पंच या किसी गणमान्य व्यक्ति के घर में टीवी दिखाने का इंतजाम करें। टीचर परेशान हैं कि इतने सारे बच्चों को किसके घर में भाषण दिखाएं और कौन इसके लिए राजी होगा।

हर स्कूल के साथ कोई घर हो और वहां टीवी-केबल का इंतजाम हो, यह भी जरूरी नहीं। इंतजाम के खर्च के लिए विभाग ने कोई फंड भी जारी नहीं किया है। टीचर पहले ही पांच महीनों से मिड-डे मील का खर्च अपनी जेब से दे रहे हैं।

विभाग ने सारा कुछ टीचरों पर छोड़ दिया है। वे चाहें तो घर से टीवी लाएं या किराए पर लाएं। पर बच्चों को भाषण दिखाना यकीनी बनाएं।

बच्चों के लिए ये है मुश्किल

पांच सितंबर को सारे पंजाब से यह रिपोर्ट भी मांगी गई है कि कितने बच्चों ने भाषण देखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण बच्चों के लिए भी मुश्किल बन सकता है।

पहली समस्या यह है कि सुबह आठ से शाम पांच बजे तक छोटे बच्चों को स्कूल में बिठाया कैसे जाए। छोटे बच्चों को इतनी देर रोकना मुश्किल है। पहले विभाग ने दोपहर बारह बजे बच्चों को बुलाने की योजना बनाई थी।

फिर इस आशंका से कि बहुत से बच्चे आएं ही न, इसे रद्द कर दिया। सोमवार तक पांच सितंबर को दो बार मिड-डे-मील देने पर भी कोई फैसला नहीं हुआ था। शाम पांच बजे तक बच्चे भूख से बेहाल हो जाएंगे। गांवों में बिजली की किल्लत के चलते पानी की भी समस्या है।
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टीचर्स यूनियन ने बताया तुगलकी फरमान

गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन ने इस आयोजन को दिल्ली से जारी तुगलकी फरमान बताया है। जीटीयू के प्रेस सचिव हरनेक सिंह मावी ने कहा कि शिक्षा विभाग ने सारी जिम्मेदारी टीचरों पर छोड़ दी है।

वे अपने स्तर पर कैसे सारा इंतजाम कर सकते हैं। सूबे भर के स्कूलों में असमंजस की स्थिति है, किसी को समझ नहीं आ रहा है कि बच्चों को भाषण कैसे दिखाएं। इंतजाम तो क्या करना था, विभाग ने फंड तक नहीं दिए।

प्रमुख सचिव, शिक्षा विभाग अंजलि भांवरा के मुताबिक पांच सितंबर को सभी स्कूलों में बच्चों को प्रधानमंत्री का भाषण दिखाया जाएगा। पांच से पहले सारी तैयारियां मुकम्मल कर ली जाएंगी। अगर किसी स्कूल को कोई दिक्कत आ रही है, तो वह विभाग को सूचित करे, समस्या हल की जाएगी।
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